पूरी दुनिया से 40 मिलियन से ज़यादा मुसलमान इस वक़्त नजफ़ से कर्बला की तरफ पैदल निकल गए हैं, जानिए इस सफ़र ए इश्क की कहानी

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हर साल पूरी दुनिया से मुसलमान तीसरे शिया इमाम, इमाम हुसैन अस के रौज़े की तरफ अपने घरों से निकल पड़ते थे। लाखों की तादाद में यह लोग अरबईन के मौके पर हज़रत इमाम हुसैन अस के रौज़े पर जमा होते हैं।

पिछले साल अरबईन के मौके पर नजफ़ से कर्बला का पैदल सफर करने के बाद 40 मिलियन लोग कर्बला में रौज़ा ए इमाम हुसैन पर मौजूद थे लेकिन मुख्या धारा का मीडिया लोगों को इस सफर ए इश्क़ के बारे में नहीं बताता है।

40 मिलियन लोग रेगिस्तान की सर्दी और तपिश को बर्दाश्त करते हुए आगे बढ़ते हैं और इनमें बच्चे, मर्द, औरतें, बुज़ुर्ग के साथ साथ हैंडीकैप लोग भी की शामिल होते हैं। दिल में बस इमाम हुसैन अस और कर्बला वालों की मुहब्बत लिए यह लोग 100 किलोमीटर से ज़यादा का सफर तय करते हैं।

लेकिन आज भी लोगों में यह जानने की इच्छा है की आखिर इस सफ़र ए इश्क पर निकले लोगों को ताकत कहाँ से मिलती है। यह ताकत उन्हें इमाम हुसैन अस और उनके साथियों की कुर्बानी और उनसे होनी वाली मोहब्बत के मिलती है।

1400 साल पहले इमाम हुसैन अस ने अपने 72 साथियों के साथ कर्बला के मैदान में यजीद को बेनकाब कर दिया था और सही इस्लाम को दुनिया के सामने ज़ाहिर कर दिया था। कर्बला वालों की कुर्बानी ही उनके चाहने वालों को ताकत देती है।

बस यही वजह है की आज के दौर में पूरी दुनिया से मुसलमान एक साथ नजफ़ से कर्बला की तरफ निकल पड़ते हैं, इमाम हुसैन अस की मोहब्बत उनको अपनी तरफ खीच लेती है।

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