सर सैय्यद के बाद अंजुमन वज़ीफ़ा ए सादात ने शिक्षा के छेत्र में किया है बड़ा काम: प्रो शारिब रुदौलवी

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अंजुमन वज़ीफ़ा ए सादात व मोमिनीन का 107 वां स्थापना दिवस तहसीन गंज स्थित इमामबाड़ा मलका जहां में मनाया गया।

इस मौके पर अंजुमन के द्वारा शियों के बच्चों के लिए किये जा रहे छात्र वृत्ति योजना की तारीफ की गयी और कुछ सुझाव भी दिए गए।

प्रो. शारिब रुदौलवी ने कहा कि जो काम यह अंजुमन कर रही है उसकी मिसाल दूसरी नहीं मिलती। मुसलमानों की शिक्षा के लिए जो काम सर सय्यद और इस अंजुमन ने किया वह अब दूसरा कोई मिलना मुश्किल है। अंजुमन के संस्थापकों ने अज़ीम काम किया इसी के साथ उन्होने कहा कि वक़्त की ज़रुरत के साथ संविधान में संशोधन होना ज़रूरी है भारतीय संविधान में भी संशोधन हुआ है यहां पर भी बदलाव कुछ किये जांने चाहिए।

उन्होने कहा कि जिस तरह के लोग इस अंजुमन से जुडे हुए हैं अगर उनको मिल जाते तो वह शिक्षा के क्षेत्र में इंकलाब ला सकते थे। इस ज़रुरत है कुछ योग्य और अच्छे बच्चों की शिक्षा के लिए सीधे डोनर से सम्पर्क कर उनकी पूरी शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।

अंजुमन के महासचिव अहसान इमाम ने बताया किइस वर्ष लगभग 46 लाख रुपए छात्र वृत्ति के लिए दिए गए हैं। 1912 में मात्र एक बच्चे की स्कालरशिप से शुरू हुई अंजुमन में अब तक लाखों लोग फायदा उठा चुके हैं।

प्रो. फ़ज़्ले इमाम ने कहा कि ज़रूरी है अंजुमन की सेवाओं के बारे में लोगों क जागरूक करने की अभी भी काफी लोग अंजुमन के बारे में नहीं जानते एक मुहीम चला कर लोगों को अंजुमन के बारे में बताया जाए। उन्होने कहा की बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता पर ज़्यादा ज़ोर देने की ज़रुरत है ताकि बुनियाद मज़बूत होगी तो इमारत भी अच्छी होगी।

मुंबई से आए रज़ी रिज़वी ने कहा की अंजुमन की सेवाओं से ख़ुशी होती है लोगों को और जागरूक करने की ज़रुरत है ताकि लोग जुड़े और इसका फायदा उठाने के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे सके।

डॉ सरवत तक़ी ने अपने विचार व्यक्त करते हुआ कि अंजुमन अपने मकसद में पूरी तरह से लगी हुई इसकी पादर्शिता सेवाओं में और चार चाँद लगाती है। 107 वर्ष पूरे करने और कायम रहना इसकी सफलता को दर्शाता है।

जमानत अली ने विचार व्यक्त करते हुए कहा की अंजुमन शुरूआती शिक्षा से ही गुणवत्ता पर वर्कशॉप कर रहे है। इसके कई सेण्टर भी छात्रों को सुविधाएँ दे रहे हैं। उन्होने कहा की आज के दौर में नंबर ज़्यादा आना toppers की निशानी नहीं है। बिहार में toppers जेल जा रहे हैं। ज़रुरत है शिक्षा में गुणवत्ता की वह भी बेसिक शिक्षा से ही।

मौलाना सईदुल हसन ने कहा कि इंसान को देखना चाहिए कि समाज को उससे कितना फायदा हो रहा है। अंजुमन की खिदमात से समाज को बहुत फायदा है शिक्षा के क्षेत्र में अंजुमन की सेवाओं की तारीफ हर तरफ होती है अंजुमन के बारे में कुछ लोगों को गिला भी है। जिससे उम्मीद होती है शिकवा भी उसी से होता है।

आखिर में मौलाना ने हज़रात अली के फ़ज़ाएल इल्म के विषय पर पढ़े और मसाएब हज़रत अब्बास पढ़कर अंजुमन के संस्थापक सय्यद मोहसिन मीरज़ा और हाजी सय्यद जलालुद्दीन हैदर समेत अंजुमन के सभी मरहूमीन की रूह को सूरए फातेहा की तिलावत कर ईसाल किया।

ऐनुल रज़ा ने बताया कि पूरे देश से 14 ऐसे छात्रों का चयन किया जा रहा है जो शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनके कॉलेज की फी से लेकर कोचिंग तक की व्यवस्था अंजुमन करेगी इस प-रस्ताव को आगामी बैठक में पास कराने का प्रयास होगा।

इस अवसर पर प्रो. शारिब रुदौलवी , प्रो. फ़ज़्ले इमाम , मौलाना सईदुल हसन नकवी , वक़ार रिज़वी , डॉ सरवत तक़ी , रज़ी रिज़वी , मसऊद रिज़वी , ज़मानत अब्बास , ज़मानत अली , अहसान इमाम ,कैंसर हुसैन बाकरी आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त किये। संचालन ऐनुल रज़ा ने किया।

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