आखिर क्यों इमाम ए ज़माना (अस) ग़ैबत में हैं?

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आज हमारे ज़माने के इमाम, हज़रत इमाम महदी (अस) की विलादत का दिन है और मासूमीन (अस) से हसदीस है की जो अपने वक़्त के इमाम के बारे में जाने बिना मर जाए वह ‘जाहिल’ की मौत है। ऐसे में हमारा फ़रीज़ा है की अपने वक़्त के इमाम के बारे में ज़यादा से ज़यादा जानकारी हासिल करें।

हम सब यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि इमाम की पैदाइश को राज़ रखा गया, लेकिन बहुत से लोगों के मन में इस बात के लेकर सवाल भी उठता है कि आपकी पैदाइश को राज़ रखने का आख़िर क्या कारण था?

इतिहास में इस प्रश्न का इस प्रकार उत्तर दिया गया है कि, बहुत सारी हदीसों में बयान हुआ है कि बनी अब्बास के तानाशाहों को यह बात स्पष्ट रूप से पता थी कि, इमाम हसन असकरी अ. के घर महदी नामक एक बेटा पैदा होने वाला है जो अत्याचारियों की ईंट से ईंट बजा देगा और पीड़ित लोगों की मदद करेगा और सारे संसार को अत्याचार और पाप से मुक्त कर देगा।

यही कारण है कि अब्बासी बादशाह मोतमिद इमाम असकरी अस के घर पर कड़ी निगाह रखे हुए था, यहाँ तक कि उसने कुछ दाईयो को लगा रखा था कि वह हर कुछ दिनों पर अलवियों ख़ास कर इमाम के घर जा कर पता करती रहें, और अगर किसी भी बच्चे के बारे में शक हो कि वह महदी है तो उसे तुरंत मार दें। यही कारण है कि अल्लाह की मर्ज़ी भी यह थी कि इमाम महदी अ. की पैदाइश को गुप्त रखा जाए।

इमाम की ग़ैबत का कारण
1. इमाम महदी अ. अल्लाह की आख़िरी निशानी हैं, आप का मिशन इस धरती पर न्यायप्रिय शासन की स्थापना करना है।
2. अगर समाज ऐसी सत्ता प्रणाली को स्वीकार करेगा तभी ऐसे शासन की स्थापना संभव है।

हदीसों में इमाम की ग़ैबत के कारणों को इस प्रकार बयान किया है।
1. न्यायिक सत्ता प्रणाली की स्थापना
2. इंसानों के आज़माने के लिए
3. आपकी सुरक्षा के लिए

मशहूर विद्वान मोहक़्क़िक़ तूसी अपनी किताब तजरीद में लिखते हैं कि, इमाम का होना अल्लाह का एहसान है, इमाम को संसार के कार्यों में इख़्तियार देना यह दूसरा एहसान है, और उनका हमारे बीच न होना यह हमारी क्षमता की कमी है। (मजमूआ ए ज़िंदगानिए चहारदा मासूम, पेज 1274)

दूसरे शब्दों में ग़ैबत के कारणों को इस प्रकार बयान किया जा सकता है
1. लोगों को आज़माने के लिए।
2. अल्लाह की सुन्नत यही रही है कि कभी कभी अपने पैग़म्बर और वली को लोगों की निगाह से छिपा के रखता है।
3. हम अपने गुनाहों के कारण उन्हें नहीं देख पाते।

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