शमीम हादी की अदबी खिदमात को अमरोहा भुला नही सकता: महबूब हुसैन ज़ैदी

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अमरोहा से ताल्लूक रखने वाली मशहूर अदबी शख्सियत सय्यद शमीम हादी की दूसरी बरसी पर प्रख्यात सांस्कृतिक संस्था इलाइची क्लब की जानिब से उनको याद किया गया।

शमीम हादी की दूसरी बरसी पर फातेहा खुवानी व शोक सभा का आयोजन देर रात्रि नवाब मंज़िल मजापोता में किया गया जिसकी अद्यक्षता हाजी महबूब हुसैन ज़ैदी ने किया, सय्यद सिब्ते सज्जाद नक़वी ने सोज़ व सलाम पेश किया जिसके बाद असलम बक़ाई ने कलाम पेश किया।

क्लब के सरपरस्त नवाब इन्तेक़ाम अली खां ने बताया कि अमरोहा की सरज़मीन से जितनी मुहबत शमीम हादी ने है उतनी मुहबत शायद ही किसी और इंसान ने की हो। उन्होंने हमेशा इस अदबी बस्ती के वक़ार को न सिर्फ ज़िंदा रखा बल्कि पूरी दुनिया मे अमरोहा की नुमाईंदगी भी की।

हाजी महबूब हुसैन ज़ैदी ने कहा कि शमीम हादी अमरोहवी को हमेशा अदबी महाफिल करने का शौक़ था, वोह हमारी गंगा जमनी तहज़ीब के मुहाफ़िज़ थे, उनकी कमी हर अदबी महफिल में शिद्दत के साथ महसूस की जाती है।

इक़बाल नक़वी ने कहा कि शमीम हादी की शख्सियत के लिए कहना गलत न होगा कि “हज़ारो साल नरगिस अपनी बे नूरी पा रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।

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