औरतों मे सबसे अफजल़ हज़रते फ़ातिमा है :मौलाना कल्बे जवाद

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छोटे इमामबाड़े मे हज़रत रसूल खु़दा के बेटी की शहादत के सिलसिले मे होने वाली मजलिसो मे आखि़री दिन की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने आयत मुवद्दत की तिलावत करते हुए कहा कि अहलेबैत से मुहब्बत नहीं बल्कि मुवद्दत करने को अल्लाह कह रहा है।

उन्होंने कहा कि मुहब्बत और मुवद्दत के अन्तर को बताते हुए कहा कि सूरत से जो हो वह मुहब्बत, और जो सीरत से हो वह मुवद्दत, हमें भी अहलेबैत से मुवद्दत करना चाहिए मुवद्दत की मीसाल देते हुए कहा कि मछली को पानी से मुहब्बत नहीं होती बल्कि मुवद्दत होती है जिस तरह बिना पानी के मछली रह नहीं सकती उसी तरह हम भी अहलेबैत के बिना नहीं रह सकते और कहा जब इन्सान को किसी से मुवद्दत हो जाती है तो उसके फज़ाएल पढ़ता रहता है चाहे उसकी ज़ुबान ही क्यो न काट दी जाए।

मौलाना ने हज़रत फ़ातिम ज़हरा की ज़िन्दगी पर रौशनी डालते हुए कहा कि दुनिया की तमाम औरतो में सबसे अफ़ज़ल हज़रत फ़ातिमा है। आखि़र मे मौलाना ने हज़रत फातिमा के उपर होने वाले ज़ुल्म का ज़िक्र किया और कहा हज़रत फातिमा ज़हरा के दरवाज़े पर आग लगाई गई और उनके बच्चे को शहीद कर दिया गया इस ज़ुल्म की वजह से फातिमा पर ऐसा ज़ख्म लगा कि कुछ दिनों बाद हजरत फातिमा की शहादत हो गई।

मजलिस के बाद अन्जुमनो ने नौहा पढ़ा और ताबूत हज़रत फ़ातिमा ज़हरा की ज़ियारत कराई गई। जिसमें काफी संख्या मे अज़ादारो ने शिरकत की।

हज़रत फ़ातिमा की ज़िन्दगी पर लगी पोस्टर प्रदर्शनी का रविवार को आखि़री दिन

छोटे इमामबाडे मे हज़रत फ़ातिमा ज़हरा की जिन्दगी पर पोस्टर प्रर्दशनी लगाई गई जो रविवार को ख़त्मआखि़री दिन है जिसमें मौलाना गुलरेज़ मेहदी ने बताया कि यहा पर काफी संख्या में लोग आ रहे है और हज़रत फातिमा ज़हरा की जिन्दगी से परिचत हो रहे है।

इस प्रर्दशनी मे हज़रत फातिमा की सादा ज़िन्दगी मे इस्तेमाल होने वाली चक्की, पुराने ज़माने की बर्तन, चारपाई और पुराने ज़माने के कपड़ो को दर्शाया गया है।

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