अयातुल्ला शहीद बाक़िर अल सद्र ने सद्दाम की ज़ालिमाना हुकूमत की नीव हिलाकर रख दी थी: मौलाना सईदुल हसन नक़वी

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अयातुल्ला शहीद बाक़िर अल-सद्र (Ayatollah Shaheed Baqir al Sadr) एक ऐसे फलसफी और रहनुमा थे जिन्होंने न सिर्फ नज़रयाती तौर पर बल्कि मुख्तलिफ समाजी, सियासी, इक़्तेसादी और मज़ाहिब मसाएल के राहे हल पेश किये। यही नहीं उन्होंने उसको अमली जामा कोशिश भी की। अयातुल्ला शहीद बाक़िर अल सद्र के यौम ए शाहदत के मौके पर, shianews.in से बात करते हुए मौलाना सईदुल हसन नक़वी (Maulana Saeedul Hasan Naqvi) ने यह बात कही।

मौलाना सईदुल हसन ने कहा कि अयातुल्ला शहीद बाक़िर अल सद्र (Ayatollah Shaheed Baqir al Sadr) इराक के क़ौमो मिल्लत और मज़ाहिब व मसालिक के दरमियान यकसां तौर पर मक़बूल थे। आप एक ऐसे आवामी रहनुमा थे जिन्होंने सद्दाम हुसैन की ज़ालिमाना निज़ामी हुकूमत से इराकी अवाम को निजात दिलाने के लिए ज़िन्दगी भर जद्दोजेहद की और आखिरकार उसी रह में जामे शहादत नोश फ़रमाया। अल्लाह उनको जव्हार रेहमत में जगह दे और उनके दरजात को बुलंद फरमाए।

आपको बता दें कि, February 9, 1977 को अयातुल्ला शहीद बाक़िर अल सद्र (Ayatollah Shaheed Baqir al Sadr) के ऐतिहासिक विरोध के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और उनको बग़दाद ले जाया गया। जहाँ उनपर ज़ेहनी और जिस्मानी ज़ुल्म किये गए। जिसके बाद लम्बे समय तक सद्दाम की सेना ने उनपर सख्ती बनाये राखी लेकिन आयतुल्लाह शहीद बाक़िर अल-सद्र ने अपना काम जारी रखा और इमाम ख़ुमैनी के ईरान में इंक़ेलाब ए इस्लामी का भरपूर साथ दिया।

जिसके बाद, सद्दाम के हुक्म पर उन्हें April 2 1980 को गिरफ्तार कर बग़दाद ले गए और अगले ही आपकी बहन बिन्तुल हुदा को भी गिरफ़्तार कर लिया गया।

जब सद्दाम और उसके गुर्गों को लगा की इस्लामी इंक़ेलाब की आग उनके साम्राज्य को जला कर ख़ाक कर देगी। अयातुल्ला शहीद बाक़िर अल सद्र (Ayatollah Shaheed Baqir al Sadr) और उनकी बेहेन बिन्तुल हुदा को April 8, 1980 को दर्दनाक तरीक़े से शहीद कर दिया गया।

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