अपनी पढाई से समय निकाल कर रातों को काम करते थे अयातुल्लाह मराशी नजफ़ी, ‘बना दी इस्लामी दुनिया तीसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी’

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अयातुल्लाह मराशी अल नजफ़ी का नाम सुनते ही लाइब्रेरी और किताबों का ज़िक्र निकलता है। अयातुल्लाह बुरुजर्दी के बाद अयातुल्लाह मराशी का नाम इस्लामी दुनिया में जाना जाता है।

अयातुल्लाह मराशी ने एक लाइब्रेरी की नीव रखी थी जो आज ईरान की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है और इस्लामी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। यहाँ सबसे बहुत सारी किताबें और मनुस्मृतियाँ मौजूद हैं, जो बेहद कीमती हैं।

अयातुल्लाह मराशी नजफ़ी ने अपनी लाइब्रेरी के लिए किताबों को जमा करने का सफर नजफ़ में अपनी दिनी तालीम हासिल करने के साथ शुरू किया था। उन्होंने कई मनुस्मृतियाँ रातों को काम करके जो पैसे मिलते थे उससे खरीदी, वह दिन में पढ़ते थे और रात में काम करते थे। उनकी एक ख़ास बात थी कि वह हर खरीदी हुई किताब के कवर पर लिखते थे कि यह किताब उन्होंने कैसे खरीदी थी।

अपनी पढाई पूरी करने के बाद जब अयातुल्लाह मराशी वापस ईरान लौट आये तो वह अपने साथ सारी जमा की हुई किताबें भी लाये थे। पहले तो उन्होंने यह सारी किताबें अपने घर में ही रखी थी लेकिन साल 1965 में मराशिय्या स्कूल की स्थापना करने के बाद उन्होंने वहां पर दो कमरों में लाइब्रेरी बना दी। कुछ ही समय में तीसरे तल पर लाइब्रेरी बनायीं गयी।

लेकिन किताबों के प्रति लोगों की बढती उत्सुकता को देखते हुए अब जगह कम पड़ने लगी थी। इसी के चलते, सन 1974 में अयातुल्लाह मारशी नजफ़ी ने पब्लिक लाइब्रेरी खोली जिसमें 16000 से ज़यादा हाँथ से लिखी हुई और प्रिंटेड किताबें रखी हुई थी। मुजूदा समय में अयातुल्लाह मारशी लाइब्रेरी में 80,000 से ज़यादा मनुस्मृती और एक मिलियन से ज़यादा प्रिंटेड किताबें मौजूद हैं।

Source: WikiShia

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