आज हुई थी अयातुल्लाह मोहसिन अल-हकीम की वफात, ‘अयातुल्लाह सिस्तानी और इमाम खुमैनी के बेटे के थे उस्ताद’

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अयातुल्लाह मोहसिन अल हकीम 20वीं सदी के बड़े आलिमों में से एक थे। अयातुल्लाह बुरुजर्दी की वफात के बाद शिया समुदाय उनकी तरफ ज़यादातर मामलों को लेकर रुजू करता था।

कम्युनिज्म के खिलाफ उन्होंने इराक में मोर्चा खोला था, उन्होंने शिया मुसलमानों से कम्युनिस्ट पार्टियों की सदस्यता ग्रहण करने से मना किया था। वहीं धार्मिक मामलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने नजफ़ (इराक) में एसोसिएशन ऑफ़ स्कॉलर्स बनायीं थी।

हसन अल बक्र के तख्ता पलट के बाद, बाथ पार्टी ने अयातुल्लाह मोहसिन अल हकीम पर दबाव बढ़ा दिया था की वह अपनी मुहीम को बंद कर दें। अपने आखरी दिनों में अयातुल्लाह मोहसिन अल हकीम को नज़रबंद कर दिया गया था, साथ ही इराक में शिया समुदाय के लिए मुश्किलें भी बढ़ा दी थीं।

इतनी मुसीबतों के चलते, अयातुल्लाह मोहसिन अल हकीम बिमारी के चलते 27 रबिअव्वल (2 जून 1970) इस दुनिया से रहलत फार्म गए। तब वह 84 साल के थे। उनके जनाज़े को बग़दाद से कर्बला और फिर कर्बला से नजफ़ लाया गया था। उनको उनकी लाइब्रेरी के पास दफनाया गया था, जो जगह उन्होंने खुद ही चुनी थी।

अयातुल्लाह मोहसिन अल हकीम के छात्रों की सूची देख कर आप खुद हैरान हो जाएँगे। इस सूची में, अयातुल्लाह सिस्तानी, इमाम मूसा सद्र, अयातुल्लाह इमाम खुमैनी, अयातुल्लाह वहीद खुरासानी, अयातुल्लाह नासिर मकरेम शिराज़ी, आदि शामिल हैं।

Source: WikiShia

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