आरएसएस व भाजपा को रिझाने के लिए मज़हब का इस्तेमाल बंद करें लोग: मौलाना कल्बे जवाद

Share This News

आज कल धर्म की आड़ में राजनीती करने का फैशन आम हो रहा है। कहीं मुस्लिम महिलाएं गाय को राखी बांधते नज़र आती हैं, तो कहीं पूर्व प्रधानमंत्री के लिए मजलिस के लिए आयोजन हो रहा है। कुछ लोगों ने अपने पूर्वजों को दूसरे धर्म का बताना शुरू कर दिया है तो कुछ ने एक सियासी पार्टी के खिलाफ अपनी ज़बान सिल दी है।

ऐसे में अब शिया धर्मगुरुओं और समाज के प्रतिष्टित लोगों ने इस मामले पर बयान देना शुरू कर दिए हैं। उन्होंने न सिर्फ ऐसे लोगों की मज्ज़म्मत की है बल्कि उनको बाज़ आने की ताकीद की है।

आज जुमा का खुतबा देते हुए मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि उन लोगों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं जो की मामूली लाभ के लिए धर्म और शरीएत का मज़ाक उडा रहे है। कोई गाय को राखी बांधकर हिंदु धर्म का मज़का बना रहा है तो कोई मंदिरों में जाकर घंटा बजा रहा है और कोई मजलिसों का व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।

मौलाना ने कहा कि आप श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं लेकिन इमाम हुसैन अ0स0 के लिए इखतियार किये जाने वाले तरीकों का तो गलत प्रयोग ना करें। ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि आर0एस0एस0 और बीजेपी अछी तरहा जानते हैं कि ये लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं।

मौलाना ने कहा कि ऐसे लोगों का वही हश्र होगा जो मीर सादिक और मीर जाफर का हुआ, उन्होंने जिनकी खातिर गद्वारी की थी उन्ही लोगों ने उन्हे उन्के अंजाम तक पहुचाया था।

वहीँ डॉ कल्बे सादिक के बेटे व मुस्लिम स्कॉलर डॉ कल्बे सिबतैन नूरी ने अपने फेसबुक पोस्ट में मौलाना कल्बे जवाद के इस बयान का समर्थन किया है।

उन्होंने लिखा कि आसिफी मस्जिद लखनऊ के इमामे जुमा बरादरम मौलाना कल्बे जवाद साहब ने आज के ख़ुतबे में जिस तरह उन कुछ सियासी लोगों की सख़्त मज़म्मत की है जो अपने सियासी फायदे के लिए शिया मसलक का मज़ाक़ उड़वा रहे हैं और बदनाम कर रहे हैं। इस बयान की मैं पुर ज़ोर हिमायत करता हूँ और सभी ओलमा व ज़ाकेरीन हज़रात से भी गुज़ारिश है कि खुल कर इन मामलों पर अपनी राय रखें। ख़ामोशी और मसलहत पसन्दी हर मौके पर मुनासिब नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...