दीन ए इस्लाम की हिफाज़त की खातिर इमाम हुसैन अपने कुनबे के साथ 28 रजब को मदीना से हुए थे रुखसत

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नवासए रसूल इमाम हुसैन (Imam Husain) के मदीने से सफर की याद में इस्लामी महीने रजब की 28 तारीख को सफर इमाम हुसैन का जुलूस निकाला जाएगा।

हुसैनाबाद के अब्बास नगर स्थित इमामबाड़ा सुगरा में दोपहर 12:30 बजे तिलावते कलामे पाक से मजलिस का आगाज होगा, जिसके बाद आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफाक मजलिस को खिताब करेंगे। मजलिस के बाद इमाम हुसैन (Imam Husain) के मदीने से रवानगी की याद में अमारी, जुलजनाह, अलम, हजरत इमाम हुसैन के छह माह के पुत्र जनाबे अली असगर की निशानी गहवारे की जियारत अकीदतमंदों को कराई जाएगी।

वहीं सआदतगंज स्थित कर्बला दियानुतदौला में शाम 4 बजे मजलिस होगी, जिसे मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफाक खिताब करेंगे। मजलिस में मौलाना इमाम हुसैन (Imam Husain) की मदीने से रवानगी का मंजर बयान करेंगे, जिसके बाद कर्बला परिसर में ऊंटों पर अमारियां, इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह, हजरत अब्बास की निशानी अलम, जनाबे अली असगर की निशानी गहवारा आदि तबर्रुकात की जियारत अकीदतमंदों को कराई जाएगी। इसके अलावा शहर के अन्य इमामबाड़ों में भी मजलिस-मातम का आयोजन किया जाएगा।

यह कारवां ६० हिजरी क़मरी वर्ष के छठे महीने रजब की २८ तारीख़ को मदीने से मक्का की ओर चला था।

इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम (Imam Husain) के भाई मुहम्मद बिन हनफ़िया ने ही नहीं बल्कि मदीना नगर के अनेक वरिष्ठ लोगों ने इमाम हुसैन को रोकने का प्रयास किया था परन्तु वे हरेक से यह कहते थे कि मेरा उद्देश्य, अम्रबिल मारुफ़ व नहि अनिल मुनकर है अर्थात मैं लोगों को भलाई का आदेश देने और बुराई से रोकने के उद्देश्य से जा रहा हूं। हुसैन जा रहे थे।

पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों से नगर लगभग ख़ाली होने वाला था। वे जिन लोगों को घर में छोड़े जा रहे थे उनमें पैग़म्बरे इस्लाम की बूढ़ी पत्नी हज़रत उम्मे सलमा, इमाम हुसैन (Imam Husain) के प्रिय भाई अब्बास की माता उम्मुल बनीन और इमाम हुसैन की एक बीमार सुपुत्री हज़रत फ़ातिमा सुग़रा थीं।

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