उम्मुल मोमेनीन हज़रत ख़दीजा (सअ) इस्लाम और रसूल पर ईमान लाने वाली पहली औरत थी

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उम्मुल मोमेनीन हज़रत ख़दीजा (सअ) की शबे वफ़ात की मुनासिबत से दीन और हम क्लासेज़ में ग़म का माहौल रहा। इन क्लासेज़ में इस्लामी शख़्सियत से जुडी हुई अहम तारीख़ आने पर मुख़्तसर सा तारुफ़ पेश किया जाता रहा है।

जगह जगह चल रही इन क्लासेज में शिक्षकों ने स्टूडेंट्स को बताया कि हज़रत ख़दीजा (सअ) इस्लाम और रसूल पर ईमान लाने वाली पहली ख़ातून हैं। हज़रत अली अस के बक़ौल उस ज़माने में किसी घर में इस्लाम न था सिवाए इस घर के जिसमे रसूल saww और हज़रत ख़दीजा (सअ) थे और आप रसूल ए खुदा के पीछे नमाज़ अदा करने वाली पहली खातून हैं।

दीन और हम के प्रवक्ता हसन रिज़वी बताया कि इंस बिन मालिक की रिवायत के मुताबिक़ रसूल ए खुदा ने फ़रमाया खतीजा क़ायनात की 4 अफ़ज़ल ख़्वातीन में से एक हैं। आपकी सख़ावत का आलम यह था कि, रसूल ए खुदा के अक़्द में आने के बाद अपना सारा माल खुदा की राह में खर्च कर दिया और रसूल ए खुदा को अपनी जान और माल पर मुकम्मल इख्तियार देते हुए फ़रमाया। आज से यह घर आपका घर है और मै भी आपकी कनीज़ हूँ।

क्लासेज में बताया गया कि आपके सब्र और तहम्मुल का आलम यह था कि, मिस्र की एक मशहूर तारीख़ निगार खातून आइशा बिन्ते शातिके मुताबिक़ हज़रत खतीजा इतनी मालदार ख़ातून थी कि उन्हें सख्तियों में रहने की आदत न थी लेकिन जब मुशरिको ने रसूल का एख़तिसारी मोहासिबा किया उस समय शेबे अबू तालिब में आप रसूल ए खुदा के शाना बा शाना भूख और प्यास और दीगर सख्तिया बर्दाश्त करती रही, यह आपके कमाल ए सब्र की वाज़ेह दलील है|

यही तो वजह है कि आपकी वफ़ात के बाद रसूल ए खुदा हमेशा आपको याद करके ग़मग़ीन हो जाया करते थे और फ़रमाते थे कि, कहाँ है हज़रत ख़दीजा (सअ) जैसी खातून जिसने इस समय मेरी तस्दीक़ की जब सबने मझे झुटलाया।

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