इल्म हासिल करे क्योंकि जिहालत से नफ़रतें बढ़ती हैं: सईदुर्ररहमान आज़़मी

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पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद (स0) और छठे इमाम हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ0स0) के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में ऐनुल हयात ट्रस्ट द्वारा विगत कई वर्षों की भांति इस वर्ष भी लखनऊ की अन्य संस्थाओं के सहयोग से छोटा इमामबाड़ा लखनऊ में 2 दिसम्बार 2018 को ‘बहार-ए-रहमत, पयाम-ए-वहदत’ के शीर्षक से कान्फ्रेन्स का आयोजन किया गया।

कायक्रम का आरम्भ क़़ारी बेहतरूज़्ज़मा द्वारा क़ुरान की आयतों की तिलावत और उसके अनुवाद के साथ किया गया। कार्यक्रम करने के उद्देष्य और उसका परिचय श्री समीर जाफ़री ने करवाया। उन्होंने बताया कि उक्त कार्यक्रम पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद साहब की विलादत की मुसलमानों के बीच मशहूर दो तारीख़ों 12 रबीउल अव्वल और 17 रबीउल अव्वल को एक साथ मिलकर मनाने के लिये इमाम ख़ुमैनी द्वारा शुरू किये गए हफ़्ता-ए-वहदत के अवसर पर विगत कई वर्षों से मनाया जा रहा है जिसमें मुसलमानों के अलग-अलग फ़िरक़ों के ओलमाए दीन हिस्सा लेते हैं।

उन्होंने बताया कि ऐनुल हयात ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2015 में उक्त कार्यक्रम गोल्डेन पैलेस विक्टोरिया स्ट्रीट में आयोजित किया गया था तथा उसके बाद से हर वर्ष छोटा इमामबाड़ा लखनऊ में आयोजित किया जाता है। जिसमें कई अन्य तन्ज़ीमें जैसे फलाहुल मोमेनीन ट्रस्ट, मुस्लिम यूथ, हैदरी एजूकेशनल एण्ड वेलफेयर सोसाइटी, दी वन इण्डियन सोसायटी, वलीउल अस्र एकेडमी, अल-अक़्सा ट्रस्ट, चैनल विन (वर्ड इस्लामिक नेटवर्क), हादी टी0वी0, हुसैनी चैनल, अल-मोअम्मल, ख़ानख़्वाहे तूसवी कानपुर, अवधनामा व इस्लाह आदि आयोजन में भाग लेती हैं।

जिसके बाद यूनिटी काॅलेज लखनऊ के छात्रों ने हज़रत मोहम्मद साहब (स0) की प्रषंसा में सामूहिक रुप से नात प्रस्तुत की जिसको लोगों द्वारा सराहा गया। प्रथम वक्ता के रुप में ख़ानख़्वाहे तूसवी, कानपुर से श्री मोईनुद्दीन चिश्ती ने कहा कि पैग़म्बर मोहम्मद साहब ने पहले अपना आदर्ष किरदार पेष किया तभी लोगों ने उनकी सिदाक़त का कलमा पढ़ा उसके बाद उन्होंने इस्लाम का पैग़ाम पहुंचाया, वह तो आलमीन के लिये रहमत बनकर आए लेहाज़ा मुसलमानों को भी चाहिये िकवह भी अपने बेहतरीन किरदार के ज़रिये दूसरों के साथ मोहब्बत और भाईचारे के साथ आयें जिससे क़ौमी यकजहती और भाईचारे को बढ़ावा बढ़ावा मिले। सबको एक-दूसरे के हाथ में हाथ देकर पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं पर अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाफ़रे सादिक़ अलै0 का व्यक्तित्व हर व्यक्ति के लिये आदर्श है। उन्होंने सारी दुनिया के लोगों को जेहालत के अन्धेरों से निकाला और इल्म की रौशनी की तरफ़ राहनुमाई की।

द्धितीय वक्ता के रूप में अन्जुमन फ़लाहे दारैन के प्रेसीडेन्ट श्री जहांगीर आलम क़ासमी ने पैग़म्बरे अकरम हज़रत मोहम्मद (स0) के बेटियों के लिये पैग़़ामे रहमत पर प्रकाष डालते हुए कहा कि जिहालत के दौर में बेटियों से जीने का हक़ छीन लिया जाता था, उनके जन्म पर बाप ग़मज़दा होकर यह सोचकर लोगों से मुंह छिपाने लगता था कि इस ज़िल्लत को बरदाष्त करे या अपनी बेटी को ज़िन्दा दफ़्न कर दे। उस दौर में लोग अपनी बेटियों को ज़िन्दा दफ़्न कर देते थे। पैग़म्बरे अकरम हज़रत मोहम्मद (स0) ने ख़ुदा के हुक्म से बेटियों के जन्म पर जन्नत की बषारत दी। और कहा के जिस शख़्स को अल्लाह ने बेटी दी हो और वह बेटी को दफ़्न न करे, न उसकी तौहीन करे और न बेटी पर बेटों को फ़ौक़ियत दे, तो अल्लाह उस बाप को जन्नत में दाख़िल करेगा।

तृतीय वक्ता के रूप में मौलाना रज़ा हैदर ने कहा कि पैग़़म्बर हजरत मोहम्मद साहब ने पूरी मानवता को जिसमें गरीब-अमीर, दुश्मन-दोस्त सब शामिल हैं उन सबको एकता का पैगाम दिया और पैग़ामे इस्लाम व अपने किरदार से सारी दुनिया को सच्चाई पर अमल करके ने की राह दिखाई। उन्होंने कहा कि हर इन्सान को उनकी सीरत और शिक्षाओं पर अमल करना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों से एकजुट होने का आह्वान किया और कहा कि वो स्वयं अपने अमल से मानवता की सेवा और भाईचारे का संदेश दे। इन्सानियत को जोड़ने के उद्देश्य से इमाम ख़ुमैनी ने हज़रत मोहम्मद साहब के जन्म के उपलक्ष्य में 12 से 17 रबीउल अव्वल तक हफ्ता-ए-वहदत (एकता का सप्ताह) मनाने का आह्वान किया जिससे सभी मुसलमान एक साथ इस जश्न को मना सकें। जिसके बाद श्री मोहम्मद अली नियाज़ी साहब ने हज़रत मोहम्मद साहब (स0) की प्रषंसा में आकर्षक अन्दाज़ में नात प्रस्तुत करते हुए कायक्रम को और मनमोहक बना दिया।

चैथे वक्ता के रूप में वली-ए-फ़क़ीह आयतुल्लाह सै0 अली ख़ामेनाई (ईरान) के भारत में प्रतिनिधि आग़ा महदी मेहदवीपुर ने लोगों को हज़रत मोहम्मद (स0) और छठे इमाम हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ0स0) के जन्म दिवस की मुबारकबाद देते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स0) पूरी इन्सानियत के लिये पैग़ाम लेकर आये थे। वह आलमीन के लिये रहमत बनकर आए। उन्होंने सच्चाई, मोहब्बत, पड़ोसियों से हमदर्दी, भाईचारगी, यकजहती का पैग़ाम दिया और जिहालत के अन्धेरे को इल्म के नूर से रौषन कर दिया। पैग़ामे इलाही को अमली जामा पहनाकर उन्होंने और उनका अनुसरण करते हुए हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ (अ0स0) ने दुनिया के सामने बेहतरीन किरदार पैदा किया। वह हमेषा सलाम करने में पहल करते थे। वह कहते थे कि सबसे अच्छा काम माफ कर देना है। वह लोगों के बीच एकता को मानव जाति की सफलता के लिए बहुत जरूरी मानते थे इसलिए उन्होंने एक दूसरे की दुश्मन जातियों को आपस में एकजुट किया।

उन्होंने कहा हालांकि मुसलमानों के विभिन्न मतों और पंथों के बीच आंशिक मतभेद मूल सिद्धातों में नहीं हैं। इस्लाम के मूल सिद्धांतों को मानते हुए मुसलमानों के बीच एकता क़ायम की जा सकती है। मुसलमानों के बीच छिपे बैठे इस्लामी एकता के उन शत्रुओं का पता लगाना बहुत कठिन है जो इस्लाम की पोशाक में मुसलमानों को धोखा दे रहे हैं। इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम आपसी फूट को इस्लाम की कमजोरी और दुश्मन की ओर से गलत फायदा उठाए जाने का कारण बताते थे। इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम के शिष्यों में सिर्फ शिया नहीं थे बल्कि अहले सुन्नत के बड़े बड़े धर्मगुरू भी उनके शिष्यों में दिखाई देते हैं।

जिसके बाद यूनिटी काॅलेज लखनऊ के छात्रों ने एक ड्रामा प्रस्तुत किया जिसमें अपने बेहतरीन अभिनय से उन्होंने दिखाया कि किस तरह लोग मुसलमानों में आपस में ग़लतफ़हमियां पैदा करके तथा दुष्प्रचार करके उन्हें आपस में लड़ाने का प्रयास करते हैं। उक्त ड्रामे में छात्रों ने जीवन्त किरदार प्रस्तुत किया जिसको उपस्थित लोगों ने बहुत पसन्द किया।

पांचवे वक्ता के रूप में सईदुर्ररहमान आज़़मी प्रिंसिपल दारूल उलूम, नदवतुल ओलमा लखनऊ ने कहा कि इन्सान को चाहिए कि इल्म हासिल करे क्योंकि जिहालत से नफ़रतें बढ़ती हैं, सभी को आपस में मिल-जुल कर रहना चाहिए क्योंकि एकता की राह पर चलकर दुश्मन की चालों का ख़ात्मा किया जा सकता है। वक़्त की ज़रूरत है के पैग़म्बर मोहम्मद साहब द्वारा जो दूसरों को क्षमा करते हुए उनके साथ मोहब्बत से पेश आने का रास्ता दिखाया गया है उस पर अमल करके पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद (स0) के किरदार को दुनिया के सामने पेष किया जा सकता है। पैग़म्बरे इस्लाम सिर्फ़ मुसलमानों के लिये नहीं बल्कि सारी इन्सानों और आलमीन के लिये रहमत हैं। आज इस्लाम दुश्मन ताक़तें मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करके उनकी ताक़त को टुकड़ों में बांटने के लिये काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि मिलकर रहें और अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थाम लें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मजलिसे ओलमाए हिन्द से मौलाना सै0 कल्बे जव्वाद ने श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि इत्तेहादे इस्लामी इस वक़्त की सबसे बड़ी और अहम जरूरत है उन्होंने कहा कि अगर सारे मुसलमान एक जुट हो जाएं तो इस्लाम के नाम पर आतंकवाद फैलाने की शत्रुओं की साज़िश नाकाम हो जाएगी और इस्लाम का अस्ल पैग़ाम जो कि सच्चाई, न्याय, सबकी सुरक्षा और सलामती व मोहब्बत का पैग़ाम है वह सारी दुनिया के सामने आएगा। इस्लाम दूसरे धर्मों का अनादर करने की इजाज़त नहीं देता है। उन्होंने इस हफ़्ताए वहदत को मुसलमानों की एकजुटता के लिये एक बहुत ही अच्छा अवसर बताया। पैगम्बरे इस्लाम ने अपने किरदार से नैतिक मूल्यों की बेहतरीन मिसाल पेष की जो कि हम सबके लिये नमूनाए अमल है।

कार्यक्रम में मंच का संचालन करते हुए मौलाना हैदर अब्बास ने इस्लाम की दोनों अज़ीम शख़्सियातों की विलादत की मुबारकबाद पेश करते हुए पैग़म्बर मोहम्मद साहब के जीवन पर प्रकाश डाला और इमाम जाफ़रे सादिक़ अलै0 की शिक्षाओं का बयान करते हुए दिलों पर असर डालने वाले अन्दाज़ में श्रोताओं को एकता और भाईचारे का पैग़ाम दिया।

उक्त कार्यक्रम में वक्ताओं के अतिरिक्त मौलाना सईदुल हसन, मौलाना मन्ज़र सादिक, मौलाना जाबिर जौरासी, मौलाना हसनैन बाक़री, मौलाना यूसुफ हुसैनी नदवी, जनबा मोहम्मद अली नियाज़ी, मौलाना इस्तेफ़ा रज़ा, मौलाना क़मरूल हसन, मौलाना रज़ा हुसैन, और दीगर मौलाना भी मौजूद थे। अन्त में दुआ व धन्यवाद के साथ कार्यक्रम में सभी सम्मानित मेहमान उलेमाओं को उपहार दिया गया।

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