ज़रूर पढ़ें: आखिर इमाम अली (अस) मशहूर आलिम ए दीन अयातुल्लाह बुरुजर्दी को कितना पसंद करते थे?

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अयातुल्लाह बुरुजर्दी अलाम ए इस्लाम की एक जानी मानी शख्सियत थे और उनके इल्म का पूरी दुनिया में बोल बाला था। इतिहास में एक ऐसा वाक़ेया दर्ज हुआ है जहाँ एक अलीम ने अयातुल्लाह बुरुजर्दी का सम्मान किया, जिसके बदले खुद इमाम अली (अस) ने उस आलिम ए दीन का सम्मान किया था।

अल्लामह नाहावंदी ने खुद इस वाक़ेया को बयान करते हैं।

जब मरहूम अयातुल्लाह बुरुजर्दी मशहद आये थे तो उन्हें मैंने अपनी जगह हरम ए इमाम रज़ा (अस) में नमाज़ ए जमात की इमामत करने के लिए कहा था। और उनके सम्मान में मैंने उनके पीछे नमाज़ अदा की थी।

कुछ समय बाद, मुझे नजफ़ अल-अशरफ जाने का मौका मिला और वहां पर उस समय अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अस) के रौज़े में बुज़ुर्ग आलिम ए दीन अयातुल्लाह सैय्यद अबुल हसन इस्फ़हानी इमाम ए जमात थे। जब मैं वहां पंहुचा तो उन्होंने मुझसे कहा कि आप आज इमामत करें और मैं आप के पीछे नमाज़ अदा करूँगा।

अल्लामह नाहावंदी ने कहा कि मैं बहुत हैरान था कि आखिर अयातुल्लाह इस्फ़हानी जैसे बड़े आलिम, जिनको खुद इमाम ए ज़माना (अस) ने ख़त लिख कर कहा हो कि ‘आप लोगों के दरमियान रहिए और अपने घर के बाहर लोगों से मिलें ताकि वोह आपके इल्म से फायदा उठा सकें। आप लोगों की मदद करें, मैं (इमाम ए अस्र) आपकी मदद करूँगा।’ ऐसा मुक़द्दस आलिम ने मुझे आगे करके मेरे पीछे नमाज़ अदा कर रहे हैं।

अल्लामह नाहावंदी आगे कहते हैं कि मैं अभी तक यही सोच रहा था कि इतने आला दर्जे के आलिम ए दीन मेरे पीछे नमाज़ पढ़ रहे हैं। मैं बस नमाज़ शुरू करने ही जा रहा था, उतने में इमाम अली (अस) के रौज़ा ए मुबारक से आवाज़ आई कि “तुमने मेरे बेटे बुरुजर्दी का सम्मान किया था तो हमने तुम्हारा सम्मान किया है, जहाँ अयातुल्लाह अबुल हसन इस्फ़हानी जैसे आलिम ने तुम्हारे पीछे नमाज़ अदा की है।”

यह वाकेया हज आग़ा हाशिमी नजहद की स्पीच से लिया गया है जो ‘करामत व हिकायते अशिकाने खुदा’ में दर्ज है।

Source: Al-Islam.org

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