इमाम (अस) और उनके असहाब ने कुर्बानी देकर दीन की इज्जत को कयामत तक के लिए बचा लिया

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आज इमामबारगाह डॉ आग़ा और इमामबारगाह झाऊलाल में मजलिस पढ़ते हुए मौलाना अख्तर अब्बास जौन ने कहा कि इमाम हुसैन (अस) का रास्ता इज़्ज़त का रास्ता है। कर्बला में मसाएब के साथ एक पहलू ऐसी फ़ाज़िलातों का भी है। इमाम और उनके असहाब ने बहुत सी ऐसी फाज़िलातें, दुनिया के सामने रखी है जो कहीं और नहीं देखी जा सकती है। उस में से सबसे अहम फजीलत इज्जत है। इमाम और उनके असहाब ने इतनी बड़ी कुर्बानी दे दी लेकिन दीन की इज्जत को कयामत तक के लिए बचा लिया।

मौलाना ने कहा कि इमाम ने है हात मिननज़ ज़िल्लाह (ज़िल्लत हरगिज़ क़ुबूल नही) का नारा देके कर्बला में यज़ीद को ये बता दिया कि तुम चाहे जितने बड़े हाकिम हो और चाहे जितनी बड़ी फौज और ताक़त हो हम इज़्ज़त की मौत को ज़िल्लत की ज़िंदगी से कहीं बेहतर समझते हैं।

उन्होंने कहा कि साथ ही इमाम ने क़यामत तक के लिए इंसानो और क़ौमों को यह पैग़ाम भी दे दिया है कि जो भी क़ौम आगे बढ़ना चाहती है और अपना हक हासिल करना चाहती है उसे सबसे पहले ये तय कर लेना होगा कि ज़िल्लत हरगिज़ क़ुबूल नही चाहे उसके लिए कितनी बड़ी क़ुरबानी देनी पड़े।

उन्होंने यह भी कहा कि और यही सबब है कि इमाम हुसैन (अस) और उनके असहाब कल भी सर बुलंद थे और आज भी हैं और जैसे जैसे वक़्त गुज़रता जा रहा है उनकी बुलंदी और परवाज़ करती जा रही है।

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