इमाम ए ज़माना (अस) की विलादत की ख़ुशी में कुछ इस तरह रौशन रहे मस्जिद व इमामबारगाह

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शबे बराअत यानि अपने गुनाहों से माफी की रात में इबादतगाहों से तिलावत ए कुरान की आती दिल सुकूनआवाजें, लबों पर गुनाहों की माफी और अपने पुरखों की बख्शीश की दुआ। मंगलवार को शबे बारात पर कुछ ऐसे ही नजारें शहर की इबादतगाहों में नजर आए।

इमामबाड़े व कब्रिस्तान शब ए बारात पर रोशनी में सजाया गया था। यहां पर पूरी रात लोगों ने अल्लाह से दुआ की और माफी मांगी। मरने वालों को ईसाले सवाब पहुंचाने के लिए लोगों ने अपने रिश्तेदारों, अजीजों और दोस्तों की कब्र को फूलों और रोशनी से सजाया और उनकी कब्रों को कुरान की तिलावत से रोशन किया। रात भर लोग एक कब्रिस्तान से दूसरे कब्रिस्तान अपने रिश्तेदारों की कब्रों पर गए और सूर ए फातेहा पढ़ कर उनको ईसाले सवाब किया।

शब-ए-बारात पर पुराने लखनऊ की इबादतगाहों और क्रबिस्तान में लोगों की चहल पहल नजर आई। मौलाना सैफ अब्बास ने बताया कि शबे बारात निजात की रात है। इस रात की बहुत फजीलत है। लोगों को रात भर इबादत करना चाहिए और अपने पुरखों व अपने गुहानों की बख्शीश के लिए माफी मांगना चाहिए। मौलाना ने कहा कि इस मांगी गई दुआ को अल्लाह रद नहीं करता है। शबे बारात की रात आमद ए इमाम भी है। इसलिए लोगों पटाखे जलाकर खुशी मनाते है और अपने घरों में नज्र व महफिल का इंतजाम करते हैं। वहीं पुराने लखनऊ के ऐशबाग कब्रिस्तान और मलका जहां की कर्बला,इमामबाड़ा गुफरानमॉब,आगा बाकर, तालकटोरा कर्बला, सुप्पा कब्रिस्तान में देर रात तक काफी भीड़ रही । ऐशबाग कब्रिस्तान व मलका जहां की कर्बला पर अत्याधिक भीड़ होने की वजह से पुलिस ने रामलीला ग्राउंड से ही गाड़ियों की आवाजाही रोक दी थी।

इमाम की विलादत पर शुरू हुई महफिलें
शिया मुसलमानों के आखिरी इमाम इमामे अस्र के जन्मदिन 15 शाबान की खुशी में बुधवार को शहर के विभिन्न स्थानों पर महफिल-मीलाद का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर शहर के इमामबाड़ों, रौजों, कर्बला और मस्जिदों में खूबसूरत रोशनी की गई। हुसैनाबाद एंड एलाइड ट्रस्ट की ओर से डालीगंज स्थित कर्बला मलका आफाक में मगरिब की नमाज के बाद से शुरू हुआ महफिलों का सिलसिला रात भर जारी रहा। कर्बला में शाम से ही अकीदतमंदों का पहुंचना शुरू हो गया जो वक्त के साथ बढ़ता गया। अकीदतमंदों ने कर्बला में जियारत कर नमाज, दुआ, तिलावते कलामे पाक कर रात गुजारी। पूरी रात कर्बला में लोगों ने इमाम की विलादत पर नज्र व महफिलें की।

हुसैनाबाद एंड एलाइड ट्रस्ट की ओर से इमामे अस्र के जन्म की खुशी में मंगलवार शाम से ही डालीगंज स्थित कर्बला मलका आफाक (गार वाली कर्बला) में महफिल का आयोजन शुरू हुआ। मगरिब की नमाज के बाद हुई महफिल को मौलाना जाफर अब्बास ने खिताब करते हुए इमाम के जन्म और गैबत पर रोशनी डाली। कर्बला में रात 12 बजे हुई महफिल को मौलाना अली मुत्तकी जैदी ने खिताब किया, जबकि बुधवार को सुबह की नमाज के बाद होने वाली महफिल को मौलाना नाजिर अब्बास खिताब करेंगे। सुबह 8 बजे होने वाली महफिल को आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफाक और दोपहर को होने वाली महफिल को मौलाना मोहम्मद मशरिकैन महफिल को खिताब करेंगे। इसके अलावा ट्रस्ट की ओर से हुसैनाबाद स्थित छोटा इमामबाड़ा, आसिफी इमामबाड़ा, हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ में भी महफिलों का आयोजन किया गया, जिसमें उलमा ने इमाम के जन्म और गैबत पर रोशनी डालते हुए गैबते इमाम में उनके मानने वालों की जिम्मेदारियां बयान की। हुसैनाबाद स्थित घंटाघर तालाब पर भी गुरुवार रात महफिल का आयोजन किया गया। यहां तिलावते कलामे पाक से शुरू हुई महफिल को मौलाना तकी रजा ने खिताब किया, जिसके बाद शायरों ने अपने कलाम पेश किये।

कर्बला मलका जहां में हुआ जश्ने वली अस्र
अंजुमन खुद्दामे कर्बला की ओर से ऐशबाग स्थित कर्बला मलका जहां में मंगलवार को जश्ने वली अस्र मनाया गया। रात 9:30 बजे तिलावते कलामे पाक से महफिल का आगाज मौलाना मोहम्मद अब्बास तुराबी ने किया, जिसके बाद आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने महफिल को खिताब किया। महफिल को खिताब करते हुए मौलाना यासूब अब्बास ने शबे-बरात की फजीलत बयान की और इमाम के जन्म और गैबत पर विस्तार से रोशनी डालीमौलाना यासूब अब्बास ने महफ़िल को खिताब करते हुए इस्लाम को दहशतगर्दी से जोड़ने वालों की सख्त मज़म्मत की और कहा की आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। । महफिल की अध्यक्षता आल इंडिया शिया हुसैनी फंड के अध्यक्ष मौलाना मिर्जा मोहम्मद अशफाक करेंगे। वहीं सआदतगंज स्थित रौजए काजमैन में जश्ने इमामे जमाना का आयोजन किया जमाते हय्या अला खैरिल अमल की ओर से किया गया। यहां हुई महफिल को मौलाना आबिस जरवली ने खिताब किया।

मेहदी घाट पर सजाया गया बजरा
इमाम ए अस्र के जन्मदिन की खुशी में मंगलवार रात अंजुमन जहूरे इमामत की ओर से मेंहदी घाट पर बजरा सजाया गया। मगरिब की नमाज के बाद बजरे को खूबसूरत रोशनी और फूलों से सजाया गया, जिसके बाद बजरे पर इमाम की नज्र दिलायी गई। नज्र के बाद शुरू हुआ महफिलों का सिलसिला देर रात तक जारी रहा, जिसमें उलमा ने तकरीर की और शायरों ने अपने कलाम बारगाहे इमामत में पेश किये। अंजुमन के अध्यक्ष मोहम्मद महजर ने बताया कि शुक्रवार को सुबह की नमाज के बाद बजरे पर इमाम की नज्र दिलाई जाएगी और अकीदतमंद बजरे पर जियारत कर इमाम को अपनी मुरादें लिखे अरीजे दरिया में डालें.

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