इमाम हुसैन ने नाम पर प्यासों को पानी पिलाया जाता है, वाटर कूलर से उनका नाम हटाना संकीर्ण मानसिकता: कैफ़ी जैदी

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रायपुर रेलवे स्टेशन के वाटर कूलर से इमाम हुसैन का नाम हटाए जाने से देश भर के मुसलमानो में रोष है और वह सोशल मीडिया पर अपनी अप्पत्ति दर्ज कर रहे हैं।

समाजवादी युवजन सभा के जिला सचिव कैफ़ी जैदी ने कहा की इस बात का ताज़ा सबूत ये है कि रायपुर(छत्तीसगढ़) के मुसलमानों ने इमाम हुसैन अस. की याद में आम मुसाफ़िरों के लिए वाटर कूलर लगाकर पानी का इंतेज़ाम किया था जिस पर कट्टर मानसिकता वाले कुछ लीडरों को सख़्त आपत्ति हो गयी। इन लोगों ने इस नेक काम को इस्लामिक प्रचार के रूप में प्रचारित किया और रेलवे प्रशासन पर दबाव बना कर नामे हुसैन अलैहिस्सलाम पर सफ़ेद टेप चिपकवा दिया।

उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि हज़रत इमाम हुसैन को क्रूर, अत्याचारी यज़ीद की सेना ने चारों ओर से घेर लिया तो उन्होंने ख़ून ख़राबा टालने के लिए हिन्दुस्तान आने की इच्छा जताई, जिसे यज़ीद की सेना ठुकरा दिया। लेकिन करबला में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के बाद हिन्दुस्तान म़े इमाम हुसैन का ग़म और अज़ादारी बहुत ही श्रृध्दा से मनाया जाता है। हर मज़हब के लोग इसे मनाते हैं।

कैफ़ी ज़ैदी ने बताया कि रानी झांसी का ताज़िया, सिंधिया परिवार का ताज़िया और ऐसे अनेक ताज़िये आज भी हिन्दुस्तान में रखे जाते हैं। हुसैनी ब्राह्मणों, ईसाइयों और हिन्दुओं का अपना इतिहास है। इमाम हुसैन के नाम पर पानी और शर्बत की सबील लगाई जाती है। प्यासों को पानी पिलाया जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर सन् 61 हिजरी में ऐसी संकीर्ण मानसिकता के लोग भारत में होते तो मुझे यक़ीन है कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम कभी हिन्दोस्तान आने की तमन्ना न करते। मानव कल्याण के नाम पर समाज सेवा के इस काम में अड़ंगेबाज़ी की जितनी निन्दा की जाय कम है। फिर सोचिये, क्या देश का तालिबानीकरण नहीं हो रहा?

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