इमाम हुसैन (अस) को अलविदा नहीं बल्कि लब्बैक कहें: मौलाना आग़ा मुनव्वर अली

Share This News

अय्याम ए अज़ा आज ख़त्म हो रहा है ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग लिख रहा हैं “अलविदा या हुसैन” इसको लेकर उलामा ने साफ़ तौर पर कहा है की हमे इमाम हुसैन (अस) को अलविदा नहीं कहना है बल्कि “लब्बैक या हुसैन” कहना चाहिए।

इसी मसले पर हैदराबाद से मौलाना आग़ा मुनव्वर अली साहब का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया है जिसमें आप ने बताने के कोशिश की है कि हम को इमाम हुसैन (अस) को अलविदा नहीं लब्बैक कहना है।

उस वीडियो में उन्होंने कहा कि जैसे ही 8 रबीअव्वल की तारीख नजदीक आती है वैसे ही हमारी ज़बानो पर अलविदा हुसैन शुरू हो जाता है। पहली मोहर्रम को इस्तकबाल हो रहा होता है और 8 रबीअव्वल को अलविदा। यानी जो फर्श आजा बिछाई गई थी पहली मोहर्रम को वह लपेट दी गई है और अब अगले साल मोहर्रम में ही फ़र्शे अज़ा बिछाई जाएगी।

मौलाना ने कहा कि अलविदा का मतलब है किसी को रुखसत कर देना। यानि अब आपको हम रुखसत कर रहे हैं। अब अगले साल मुलाकात होगी मोहर्रम में। यह तोहीन है अइम्मा की। यह तोहीन है सैय्यद उस शोहदा (अस) की। हम कभी इमाम हुसैन (अस) को अलविदा नहीं कह सकते हैं हम को हमेशा उन्हें लब्बैक कहना है, अलविदा नहीं कहना है।

उन्होंने आगे कहा कि क्योंकि हम रस्मों के पाबंद हैं इसलिए बुलाते भी हैं और 8 रबीअव्वल को अलविदा भी कर देते हैं। जो भी लोग अलविदा कहते हैं वह खुलूस से कहते हैं और उनके खुलूस पर शक नहीं है लेकिन ख़ुलूस के साथ बोली गयी हर बात तो सही नहीं होती है।

मौलाना ने कहा कि हम इमाम हुसैन (अस) को अलविदा नहीं कह सकते हैं। अगर इमाम हुसैन को अलविदा कहेंगे तो हमारी जिंदगी वीरान जाएगी, हमारी जिंदगी खराब हो जाएगी। इसलिए हमें इमाम हुसैन को अलविदा नहीं बल्कि लब्बैक कहना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading...