‘इमाम हुसैन ने सही इस्लाम और बातिल इस्लाम के बीच अपने खून से लकीर खींच दी’: मौलाना अख्तर अब्बास जौन

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इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) रसूल अल्लाह के नवासे हैं और आप अपनी क़ुरबानी रसूल अल्लाह के इस्लाम को बचाने के लिए दी। रसूल अल्लाह इस्लाम का पैग़ाम लाये थे और इस्लाम के माने अमन और शांति के हैं।

इस्लाम का पैग़ाम अमन और शांति का पैग़ाम है और किसी भी इलाही मज़हब का मक़सद समाज से ज़ुल्म को ख़तम करना होता है। रसूल अल्लाह ने इस्लाम को जिस समाज में पेश किया वहां सियासी और समाजी ज़ुल्म को ख़तम किया। यज़ीद इस्लाम को इस तरह से पेश करना चाहता था की इस्लाम के नाम पर लोगों पर ज़ुल्म किया जाए और उनको क़तल किया जाए।

इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) ने बहुत थोड़ी तादाद के साथ इतनी बड़ी ताक़त के मुक़ाबले में खड़े हो कर कर्बला से दो पैग़ाम दिए थे। पहला यह अल्लाह के सही दीन के लिए अपने अज़ीज़ों की क़ुरबानी देने के लिए कोई देर नहीं करना चाहिए और हक़ से बड़ी कोई चीज़ नहीं होती और हक़ के लिए कितनी बड़ी क़ुरबानी दी जा सकती हैं।

इमाम हुसैन ने अपनी क़ुरबानी इसलिए दी के वह इस्लाम जो यज़ीद पेश कर रहा था, उस इस्लाम को रसूल अल्लाह के इस्लाम से जुदा कर सके और रसूल अल्लाह के सही इस्लाम को लोगों के सामने पेश कर सकें।

इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) ने अपनी क़ुरबानी इसलिए दी के वह इस्लाम जो यज़ीद पेश कर रहा था, उस इस्लाम को रसूल अल्लाह के इस्लाम से जुदा कर सके और रसूल अल्लाह के सही इस्लाम को लोगों के सामने पेश कर सकें। इमाम हुसैन का एक कारनामा यह था की उन्होंने सही इस्लाम और बातिल इस्लाम के बीच अपने खून से लकीर खींच दी। एक तरफ बानी उमय्या का इस्लाम था और एक तरफ रसूल अल्लाह का इस्लाम था इमाम हुसैन ने अपनी क़ुरबानी से लोगों के लिए आसानी कर दिया के वह सही इस्लाम को पहचान सके।

इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) की क़ुरबानी और कर्बला में इन्क्विलाब के बहुत असर बहुत हुआ। कर्बला से दर्स लेते हुए अयातुल्ला खोमैनी ने ईरान में इस्लामी इन्क्विलाब लाये। उन्होंने इमाम हुसैन के इन्क्विलाब से दर्स लिया और उस वक़्त के ज़ालिम हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथी शहीद हो गए थे लेकिन उनका मक़सद आज भी ज़िंदा है उनका रास्ता आज भी बाकी है।

आज भी इस्लाम के सही चेहरे को ख्रराब करने के लिए, अमरीका, इस्राएल और आले सऊद ने मिल कर एक यज़ीदी इस्लाम को ISIS, तालिबान, अल नुसरा जैसे आतंकी गुटों के रूप में तैयार किया है। ऐसे यज़ीदी इस्लाम के खिलाफ आज भी हमे इमाम हुसैन के रस्ते पर चलने की ज़रुरत है ताके रसूल अल्लाह के सही इस्लाम को पेश कर सके।

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