ईरान आज आज़ाद देश है लेकिन आज़ादी मुफ्त नहीं मिलती

Share This News

ईरान से हमारी नफरत की कई वजह हो सकती हैं। शिया निज़ाम, सऊदी अरब, अमेरिका या इज़रायल से से ईरान की दुश्मनी। या फिर सीरिया, यमन, लेबनान, अफ़ग़ानिस्तान, फिलिस्तीन, और ईराक़ में ईरान की फौजी मौजूदगी।

अपनी नफरत के पर्दे को एक मिनट के लिए हटाकर इन छह तस्वीरों को एक नज़र देखेंगे तो नफरत की दीवार के पार अपने पैरों पर खड़े मुसलमान और दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताक़तों को ललकारते नौजवान भी हैं। दुश्मनी भरे घर के आंगन में आत्मसम्मान और थोड़ा से गर्व महसूस करना है तो इन्हें ज़रूर देखिए।

इनमें दो तस्वीरें तेहरान के मौहल्ला जमारान की एक तंग गली और दूसरी उसमें बने एक कमरे के स्टूडियों अपार्टमेन्ट नुमा घर की हैं। इस घर में ईरानी क्रांति के बाद इस क्रांति का नेता रहा करता था।

एक तस्वीर अमेरिकी एम्बेसी की है। इसपर क्रांति के बाद ईरानी छात्रों ने क़रीब 450 दिन क़ब्ज़ा रखा। आज ये साम्राज्यवाद के ख़िलाफ दुनिया भर के संघर्ष का एक बड़ा प्रतीक है।

एक तस्वीर तेहरान की शहरी हद से थोड़ा दूर बने क़ब्रिस्तान बहिश्ते ज़ैहरा की है। इस क़ब्रिस्तान में दो लाख से ज़्यादा शहीद रहते हैं जिन्होंने ईरानी क्रांति, ईरान-इराक़ युद्ध, लेबनान, सीरिया, यमन, अफ़ग़ानिस्तान में संघर्ष के अलावा दुनिया के अलग अलग हिस्सों में इज़रायल या अमेरिकी ख़ुफिया तंत्र/सेना के हाथों जान गंवाई है।

https://www.facebook.com/story.php?story_fbid=10217220570765747&id=1215446531

इसमें लाखों गुमनाम शहीद हैं जिनकी क़ब्र पर फरज़ंदे रूहअल्ला यानि रुहअल्ला ख़ुमैनी के बेटे लिखा है। एक आज़ादी स्क्वायर है यानि क्रांति की यादगार।

और एक तस्वीर उस शख़्स की घर वापसी की भी है जिसे अमेरिकी समर्थन वाली सरकार ने घर से बेघर कर दिया था। 15 साल बाद जब ये शख़्स लौट कर आया तो ईरान ही नहीं दुनिया की तारीख़ में कई नए अध्याय जुड़ गए।

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार ज़ैग़म मुर्तज़ा ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर लिखा है)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *