इस्लामी दुनिया में एकता और फिलिस्तीन महत्वपूर्ण मुद्दे हैः रहबर ए मोअज़्ज़म अयातुल्लाह खामनाई

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इस्लामी जगत को चाहिये कि आज वह महत्वपूर्ण विषयों के संबंध में बुनियादी भूमिका निभाये और वह दशकों पुराने अनुभवों को दोहराने की अनुमति न दे।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने इस संबंध में बल देकर कहा है कि इस्लामी जगत को चाहिये कि वह महत्वपूर्ण मामलों के बारे में ऊंची आवाज़ के साथ अपने दृष्टिकोणों की घोषणा करे। वरिष्ठ नेता ने फिलिस्तीन और इस्लामी जगत के मध्य एकता को महत्वपूर्ण विषय बताया।

इसी प्रकार वरिष्ठ नेता ने दुनिया के महत्वपूर्ण परिवर्तनों के संबंध में इस्लामी देशों और सरकारों के धार्मिक दाइत्वों की ओर संकेत किया और कहा कि इस्लामी जगत के बुनियादी मामलों के बारे में स्पष्ट रूप से बात करनी चाहिये क्योंकि स्पष्ट रूप से बात करने से आम जनमत और विश्व के प्रतीभाशाली लोगों पर प्रभाव डाला जा सकता है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता बल देकर कहते हैं कि इस तरह से पश्चिमी साम्राज्य के दुष्प्रचार को विफल बनाया जा सकता है। वरिष्ठ नेता आगे कहते हैं” जायोनियों को साफ्ट वार में मात देना संभव है जिस तरह से वे लेबनान युद्ध में पराजित हो गये और विवश होकर उन्होंने इसका स्वीकार भी किया।

जायोनी शासन ने अपने अवैध लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए फिलिस्तीन की निहत्थी जनता पर सदैव अत्याचार किया है और इस कार्य में उसे पश्चिमी देशों विशेषकर अमेरिका का समर्थन प्राप्त रहा है। इस आधार पर अतिक्रमणकारी व अत्यारी के मुकाबले में फिलिस्तीनी जनता का समर्थन विश्व समुदाय का दायित्व है।

फिलिस्तीनी इतिहास के अनुभवों ने दर्शा दिया है कि यह नहीं सोचा जाना चाहिये कि जायोनियों के मुकाबले का कोई फायदा नहीं है बल्कि इस संबंध में साहसिक प्रतिरोध के जारी रहने का अवश्य परिणाम निकलेगा जिस तरह से प्रतिरोध को पिछले वर्षों की तुलना में काफी सफलतायें मिली हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के शब्दों में जायोनी एक दिन नील से फुरात तक का नारा लगाते थे किन्तु अब वे अपनी सुरक्षा के लिए दीवार बनाने पर बाध्य हुए हैं।

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