मज़लूम फिलिस्तीनियों का कत्ले आम बन्द किया जाए: मौलाना कल्बे जवाद

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येरूशलम में अमेरिकी दूतावास का स्थानांतरण और मजलूम फिलिस्तीनियों के नरसंहार की निंदा करते हुए मजलिसे उलेमाए हिन्द के जनरल सेक्रेटरी इमामे जुमा मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि येरुशलम मे अमेरिकी दूतावास का स्थानांतरण वैश्विक कानुन का उपहास एवं मजाक है। ये इकदाम दुनिया को विश्वयुद्ध की तरफ लेकर जाएगा जिस पर विश्व समुदाय को संजीदगी से गौर करना चाहिए ।

मौलाना ने कहा कि पूरी दुनिया मे अमेरिका के इस फैसले की निंदा की गई थी, इसके बावजूद अमेरिका ने ये इकदाम करके साबित कर दिया कि वो विश्व समुदाय को इज्जत की निगाह से नही देखता। जिस वक्त दूतावास के स्थानांतरण का ड्रामा हो रहा था उसी वक्त मजलूम फिलिस्तीनी जो इस इकदाम के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रर्दशन कर रहे थे उन पर इजराइली फौज ने हमला किया जिसमें बेगुनाह फिलिस्तीनियों के जान व माल का नुकसान हुआ।

मौलाना ने कहा कि ताअजुब है कि संयुक्त राष्ट्र हमेशा की तरह खामोश तमाशाई है जबकि फिलिस्तीनी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र की सभा में खुल कर उसकी खामोशी की निंदा की और इजराइली जुलम व बर्बता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। फिलिस्तीनियों पर इजराइली फौज के हमले मानवधिकार का उलंघन है मगर मानवधिकार के संघठन और वैश्विक संगठन इस अत्याचार पर खामोश हैं, ये अफसोस की बात है।

मौलाना ने इजराइली बरबरियत की निंदा करते हुए कहा कि हमेशा इजराइल ने फिलिस्तीनी मजलूमों पर अत्याचार किया है और ये सिलसिला अभी तक जारी है। इजराइल को ये मानना चाहिए कि बैत-उल-मुकद्दस पर मुसलमानों का पहला हक है और येरुशलम फिलिस्तीन का हिस्सा है मगर इजराइल ताकत के नशे में चूर फिलिस्तीन की जमीन पर नाजायज कब्जा किये हुए है और वैश्विक कानुन का भी एहतेराम नही करता।

मौलाना ने कहा कि पूरी दुनिया को सहियूंनि ताकतों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए ये इकदाम वैश्विक स्तर पर अमन और स्थिरता की दलील होगा। अगर ऐसा नही होता है तो दुनिया को बदअमनी और जंग की सूरतेहाल के लिए तैयार रहना चाहिये। अमेरिका का ये फैसला दुनिया को तबाही की तरफ लेकर जाएगा।

मौलाना ने कहा कि अमेरिका का ये फैसला दरअस्ल ईरान को घेरने की नाकाम कोशिश है। ईरान परमाणु समझौता से अमेरिका का निकल जाना और आर्थिक पाबन्दियों को लगाने के बाद येरुशलम में दूतावास के स्थानांतरण की सियासत का राज किसी से छुपा हुआ नही है। इस लिए अ संयुक्त राष्ट्र और मानवधिकार के वैश्विक संगठनों को इस इकदाम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना चाहिये।

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