ज़रूर पढ़ें यह इस्लामी कहानी: हम जैसा दूसरों के साथ करेंगे वैसा हमारे साथ होगा

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यह प्रकृति का नियम है कि हम इस दुनिया में जो भी काम करते हैं, उसकी प्रतिक्रिया हमेशा होती है। अगर हम अच्छा करते हैं, तो हम अच्छा फल पाते हैं और अगर हम बुरा करते हैं, तो हमें अंततः बुरे परिणाम की उम्मीद करनी चाहिए। “आप जो बोते हैं, उसे काटते हैं” एक मशहूर कहावत है।

कुरान ने भी इस मामले पर हमारी इस्लाह की है। इसे कहते हैं: यदि आप अच्छा करते हैं, तो आप अपने आप साथ अच्छा करते हैं। (वैसे ही) यदि आप बुराई करते हैं, तो आप अपनी बुराई करते हैं। (कुरान: सूरह 17 आयत 7)

रसूल ए खुदा मुहम्मद (सवव) के साथियों में से एक कुरान की इस आयत को बहुत पसंद करते थे और वह जहां भी जाते, इसको जोर-जोर से और बार-बार सुनाते थे।

एक यहूदी महिला जिसने उस सहाबी को इस आयत को कई बार पढ़ते सुना था, वह उसे गलत साबित करना चाहती थी और इस तरह सहाबी को लोगों के बीच रुसवा करना चाहती थी। उसने सोचा कि उसके खिलाफ साजिश रची जाए।

उसने जहर मिला कर कुछ मिठाइयाँ तैयार कीं और उन्हें उन सहाबी को दिया। जब वह मिठाई उनको मिली तो वह शहर से बाहर जा रहे थे। रास्ते में उनको दो आदमी मिले जो लम्बे सफ़र से घर लौट रहे थे। वह थके हुए और भूखे दिखाई दिए, इसलिए उन्होंने उन्हें एक अच्छा काम करने के बारे में सोचा। सहाबी ने मिठाई उन दोनों लोगों को दे दी।

बेशक, उन्हें इस बात का इल्म नहीं थी कि मिठाई में उस महिला ने चुपके से जहर मिला दिया था। जल्द ही दोनों मुसाफिरों ने मिठाई खा ली, वह गिर गए और मर गए।

जब उनकी मौत की खबर मदीना पहुंची, जिस शहर में खुद रसूल अल्लाह (सवव) रहते थे, उस सहाबी को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें पैगंबर के सामने लाया गया और साथ ही उस यहूदी महिला को भी जिसने मिठाई में जहर मिलाया था। वहां दोनों मुसाफिरों के शवों को देखकर वह दंग रह गई। वास्तव में वह मरे हुए मुसाफिर उसके अपने ही दो बेटे निकले, जो सफ़र पर गए हुए थे।

उसने पैगंबर मुहम्मद (सवव) और मोजूद सभी लोगों के सामने अपने बुरे इरादे को मान लिया कि पैगंबर के सहाबी को मारने के लिए मिठाई में मिलाया जाने वाला जहर वही था, जिसने उसके दो बेटों को मार डाला।

इस कहानी से यह साफ़ होता है की अगर हम दूसरों के लिए बुरा सोचेंगे तो हमारे साथ ही बुरा होगा और अगर अच्छा करेंगे तो हमारे साथ अच्छा होगा। यही अल्लाह का निजाम है।

Source: Al-Islam.org

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