जानिए कैसे मिला, हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अस) ‘सादिक़’ का लक़ब

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हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (Imam Jafar Sadiq) का नाम जाफ़र, आपकी कुन्नियत अबू अब्दुल्लाह, अबू इस्माईल और आपकी उपाधियां, सादिक़, साबिर व फ़ाज़िल और ताहिर हैं।

अल्लामा मज़लिसी आप (अस) के बारे में लिखते हैं कि पैग़म्बरे इस्लाम स.अ ने अपनी ज़िंदगी में हज़रत इमाम जाफ़र बिन मोहम्मद (अ) को सादिक़ की उपाधि दी और उसका कारण यह था कि आसमान वालों के नज़दीक आप की उपाधि पहले से ही सादिक़ थी।

हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ 17 रबीउल अव्वल 83 हिजरी में मदीना में पैदा हुए। इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की विलादत की तारीख को खुदा वंदे आलम ने बड़ा सम्मान और महत्व दिया है। हदीसों में है कि इस तारीख़ को रोज़ा रखना एक साल रोज़ा रखने के बराबर है।

आपके जन्म के बाद एक दिन हज़रत इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया कि मेरा यह बेटा उन कुछ ख़ास लोगों में से है कि जिनके वुजूद से ख़ुदा ने लोगों पर एहसान फ़रमाया और यह मेरे बाद मेरा जानशीन व उत्तराधिकारी होगा।

अल्लामा मज़लिसी ने लिखा है कि जब आप मां के पेट में थे तब कलाम फरमाया करते थे जन्म के बाद आप ने कल्मा-ए-शहादतैन ज़बान पर जारी फ़रमाया।

हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की शहादत उल्मा के अनुसार 15 या 25 शव्वाल 148 हिजरी में 65 साल की उम्र में मलऊन शासक मंसूर ने आपको ज़हर देकर शहीद कर दिया।

source: ABNA

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