जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण के मांग को लेकर देश भर में सऊदी अरब के खिलाफ 23 जून को होगा प्रदर्शन

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सऊदी अरब के मदीना स्थित जन्नतुल बकी में दुख्तरे रसूल और शिया मुसलमानों के चार इमामों की ध्वस्त कब्रों के विरोध और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर इस्लामी महीने शव्वाल की 8 तारीख 23 जून को विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

अलग-अलग संगठनों की ओर से विरोध-प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान चलाकर रौजों के पुनर्निर्माण की मांग की जाएगी। मजलिस उलमा-ए-हिंद की ओर से 22 से 24 जून तक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा, जबकि आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास की ओर से 23 जून को शहीद स्मारक पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

सऊदी अरब के मदीना स्थित जन्नतुल बकी में दुख्तरे रसूल और शिया मुसलमानों के चार इमामों की मजारों को ध्वस्त किये जाने के विरोध में मजलिस उलमा-ए-हिंद की ओर से शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शन किया जाएगा।

संगठन के महासचिव व इमामे जुमा मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी के नेतृत्व में आसिफी मस्जिद से विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा, जो आसिफी इमामबाड़े के मुख्य द्वार तक जाएगा। प्रदर्शन को उलमा सम्बोधित करेंगे और प्रदर्शन के उपरांत मजारों के विध्वंस और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर केंद्र सरकार और संयुक्त राष्ट्र को सम्बोधित ज्ञापन भेजा जाएगा।

संगठन की ओर से दो दिवसीय हस्ताक्षर अभियान चलाया जएगा। संगठन ने सभी उलमा व आइम्मा जुमा से 22 से 24 जून तक हस्ताक्षर अभियान चलाने और हस्ताक्षर अभियान के कपड़े को संगठन संगठन कार्र्यालय भेजने की अपील की है, जिससे सभी हस्ताक्षरों को ज्ञापन के साथ केंद्र सरकार और संयुक्त राष्ट्र भेज कर मजारों के विध्वंस का विरोध और पुनर्निर्माण की मांग की जाए।

वहीं आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास की ओर से सऊदी सरकार के जन्नतुल बकी स्थित दुख्तरे रसूल और इमामों के रौजों को ध्वस्त करने के विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा। 23 जून को शहीद स्मारक पर होने वाले विरोध-प्रदर्शन में उलमा, खुताब, जाकिर, मातमी अंजुमनों के पदाधिकारी व कौमी संगठनों से जुड़े पदाधिकारी शामिल होंगे।

मौलाना ने बताया कि लगभग 92 वर्ष पूर्व सऊदी अरब के शासक आले सऊद ने जन्नतुल बकी में रसूले अकरम की पुत्री और उनके खानदान वालों की मजारों को ध्वस्त करा दिया था। मौलाना ने कहा कि बहुत अफसोस की बात है कि सऊदी हुकूमत जिस रसूल का कलमा पढ़ती है, उसी रसूल की बेटी की कब्र पर आज तक कोई साया नहीं है, जबकि सऊदी शासक अपने बड़े-बड़े महलों में रह रहे हैं।

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