कुछ लोगों के निजी स्वार्थों की वजह से पूरी शिया कौम को बदनामी झेलना पड़ती है: प्रो फज़ले इमाम

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आज शिया कौम की पुरानी तंजीमों को जिंदा करने की सख्त जरूरत है। आज कुछ लोगों के निजी स्वार्थों के चलते पूरी शिया कौम को बदनामी बर्दाश्त करना पड़ रही है। इसलिए ऐसे लोगों को अपने जज्बातों पर काबू रखने की सख्त जरूरत है।

यह बात इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उर्दू के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे प्रो. फजले इमाम ने कही। वह सोमवार को गांधी भवन प्रेक्षागृह में मौजूदा सूरते हाल और शियों का नुक्तए नजर विषयक गोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।

गोष्ठी में सर्वसम्मति से छह सूत्रीय प्रस्ताव पारित किये गये, जिसमें देश की एकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बरकरार रखने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

गोष्ठी के संयोजक अमीर हैदर चचा ने कहा कि शिया कौम के प्रतिनिधि सभी राजनीतिक दलों में मौजूद हैं। इसलिए किसी को यह हक नहीं है कि वह अपने बयानों में यह दावा करे कि पूरी शिया कौम किसी एक राजनीतिक दल की विचारधारा को मानती है या किसी दल में है। किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ाव तीन कारणों से होता है, पहला पार्टी की विचारधारा, दूसरा राजनैतिक दबाव और तीसरा सबसे बड़ा कारण है स्वार्थ।

प्रो. शारिब रुदौलवी ने कहा कि एक पार्टी की ओर से जानबूझ कर ऐसा प्रचारित किया जा रहा है कि पूरी शिया कौम किसी एक राजनीतिक दल के साथ है, जबकि ऐसा नहीं है। संविधान ने हर व्यक्ति को स्वतंत्र मतदान का अधिकार दिया है और वह अपने विवेक से मतदान करते हैं।

गोष्ठी का संचालन करते हुए पत्रकार बाबर नकवी ने गोष्ठी को समय की जरूरत बताते हुए इसके आयोजन के लिए अमीर हैदर चचा की सराहना की। उन्होंने कहा कि चचा की पूरी जिंदगी कौम की सेवा में गुजरी है।

इस मौके पर गोष्ठी में छह सूत्रीय प्रस्ताव पारित किये गये, जिसमें शिया कौम के कुछ लोगों जो अपने फायदे के लिए आए दिन विवादित बयान देते हैं, उनकी निंदा की गयी। देश-प्रदेश में आपसी भाईचारे-सौहार्द को ईमानदारी से मजबूत बनाने, देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए विवाद फैलाने वालों के खिलाफ एकजुट होने और देश के भाईचारे और लोकतांत्रिक व्यवस्थ्थ की सुरक्षा करने, देश में अमन-शांति कायम रखने और भाईचारे को बढ़ावा देने में सहयोग देने, कौम के विवादित बयान देने वालों को गंभीरता से बयान देने और अवध की गंगा-जमुनी संस्कृति को बढ़ावा देने तथा देश में बढ़ती साम्प्रदायिकता की निंदा करते हुए साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने वाले सिर्फ देश नहीं बल्कि मुसलमानों के भी दुश्मन हैं।

प्रस्ताव में देश के प्रति वफादार रहने को ईमान का हिस्सा बताते हुए इसी रास्ते पर चलने का आह्वान किया गया है।

गोष्ठी में मुख्य रूप से डॉ. सरवत तकी, डॉ. रोशन तकी, रुबीना मुर्तजा, डॉ. नसीम निकहत, निहाल रिजवी, इंतिजार आब्दी बॉबी, सैफ बाबर, अफजाल हैदर, तारिक खान, मेराज हैदर सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।

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