कुछ मुसलमान दुनिया के लिए अपने धर्म और अकीदे का सौदा कर रहे हैं: मौलाना कल्बे जवाद

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लखनऊ की तारीख़ी आसिफ मस्जिद में 22 अगस्त को मौलाना कलबे जवाद नकवी ने ईद उल अज़हा की नमाज़ अदा कराई। नमाज के बाद मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने खुत्बा ए नमाजे ईद उल अज़हा देते हुए हजरत इब्राहीम की कुरबानी की अज़मत कुरआन की आयतों की रौशनी में बयान की।

मौलाना ने नमाजियों को खिताब करते हुए कहा कि हजरत इब्राहीम ने ख्वाब में देखा कि वो अपने बेटे हजरत इस्माइल जो उस वक्त कमसिन थे,को कुरबान कर रहे है। उन्होने ये खुवाब अपने बेटे से बयान किया। बेटे ने जवाब दिया कि बाबा आप अपने ख्वाब पर अमल कीजिये। हजरत इब्राहीम की उम्र उस वक्त 100 साल हो चुकी थी। बाप ने बेटे को ज़िबह करने के लिए मिना का रख किया और बेटे की गर्दन पर छुरी रख दी। हजरत इस्माइल ने बाप से कहा कि बाबा मेरे हाथ पांव खोल दीजिय, उसके बाद ज़िबह कीजिये।

मौलाना ने कहा कि हाथ पांव खोलने का मकसद ये भी था कि तारीख़ लिखने वाला कोई शख़स ये न लिख सके कि हजरत इब्राहीम बेटे को उनकी मर्जी के खिलाफ ज़िबह कर रहे थे। इससे ये जाहिर होता है कि नबी कमसिन होता है मगर नबूवत कमसिन नही होती। इसी तरह मासूम बूढ़ा हो सकता है मगर इस्मत बूढ़ी नही होती। हजरत इब्राहीम ने अपने ख्वाब पर अमल करते हुए बेटे को ज़िबह करना चाहा मगर ऐन वक्त पर छुरी के नीचे दुम्बा आ गया और छुरी दुम्बे की गर्दन पर चल गई।

मौलाना ने कहा कि आज भी हज में अल्लाह ने हजरत इब्राहीम और इस्माइल की यादें जिंदा रखी है ताकि दुनिया को बताया जा सके कि जो अल्लाह के लिए जीते हैं उनकी यादगारें कभी खत्म नही होतीं। खुत्बे के आखिर में मौलाना ने मुल्क में अमनो सलामती के लिए दुआ कराई।

मौलाना ने हजरत इब्राहीम की दुआ जिस का तज़किरा कुरआन ने किया है कि ऐ अल्लाह मुझे अपना मुसलमान करार दे,का हवाला देते हुए कहा कि हजरत इब्राहीम तो मुसलमान थे ही फिर वो ये दुआ क्यों मांग रहे थे।

मौलाना ने कहा कि मुसलमान होना अलग है और अल्लाह का मुसलमान होना अलग बात है। आज कुछ मुसलमान दुनिया को पाने के लिए अपने दीन और अकीदे का सौदा कर रहे हैं ,हर कोई अपना सियासी एवं दुनियावी फ़ायदा पाने के लिये अपना दीन और इमान कुरबान कर रहे है, मगर जो अल्लाह का मुसलमान होता है वो इस्तकलाल और सिबात कदमी का मुजाहिरा करता है,और दीन एवं अकीदे के बदले अपनी दुनिया को कुरबान कर देता है।

मौलाना ने अंतर्राष्ट्रीय मसाएल पर गुफ्तुगू करते हुए ईरान पर अमेरिका की पाबन्दियों की भी कड़ी निंदा की। मौलाना ने कहा के मैं कुछ दिन पहले ईरान में था, अमेरिकी पाबन्दियों की वजह से महँगाई बढ़ गई है मगर ईरानी जनता जानती है कि अमेरिका आर्थिक पाबन्दियां लगा कर उनके सर को झुकाना चाहता है इसलिए वो बहादुरी और सब्र के साथ अमेरिकी पाबंदियों का मुकाबला कर रहे हैं।

मौलाना ने भारतीय सरकार को संबोधित करते हुए कहा कि वो अमेरिका के दबाव में ईरान से अपने पुराने संबंध खत्म न करे। हमारे देश को अमेरिका की दोस्ती से बचना चाहिए क्योंकि अमेरिका ने कभी किसी दोस्त के साथ वफादारी नही की।

आखिर में मौलाना ने केराला में बाढ़ पीड़ितों के लिये दुआ की और उन्की मदद के लिये अपील भी की।

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