क्या अटल बिहारी वाजपयी ने अज़ादारी के लिए कुछ किया था: डॉ कल्बे सिब्तैन नूरी

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सोशल मीडिया पर कुछ लोग लगातार लिखते हैं कि भाजपा ने लखनऊ में बंद की गयी अज़ादारी खुलवाई थी, इसी बीच डॉ कल्बे सादिक़ के बेटे डॉ कल्बे सिब्तैन नूरी ने सोशल मीडिया पर साफ़ कहा है कि अज़ादारी खुलवाने में सिर्फ शिया उलमा और क़ौम का हाँथ है किसी सियासी जमात का नहीं।

डॉ कल्बे सिब्तैन नूरी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि शिया ओलमा के साथ अटल जी का रवय्या —— अटल जी इस मुल्क के प्रधान मंत्री रहे हैं इस लिए हम सब उनकी इज़्ज़त करते हैं लेकिन कुछ भाजपा के शिया वर्कर जो ये कह रहे हैं कि अज़ादारी खुलवाने में उनका हाथ था ये मेरी नज़र में बिलकुल भी सही नहीं है। आज मैं एक वाक़या लिख रहा हूँ जिस से ये बात बिलकुल साफ़ हो जायेगी। शिया ओलमा ने ये तय किया कि अज़ादारी के जुलूस जो सालों से बंद हैं इनकी बहाली के लिए अटल जी से बात की जाए।

चुनांचे शिया ओलमा का एक डेलिगेशन जिसमें हकीमे उम्मत मौलाना कल्बे सादिक़ साहब और मरहूम खतीब ए अकबर मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर साहब के साथ कई और ओलमा भी शामिल थे वक़्त लेकर अटल जी के दिल्ली के घर गए। जब अटल जी इन शिया ओलमा से मिलने कमरे में आये तो उनका रवय्या बहुत ख़राब था और आते ही उन्होंने कहा कि आपके धार्मिक जुलूस उसी समय खुल सकते हैं जब सुन्नी समुदाय का धार्मिक जुलूस भी निकले। अगर आप चाहते हैं कि सिर्फ आपके धार्मिक जुलूस से प्रतिबंध हट जाए और सुन्नी समुदाय का जुलूस बंद रहे तो ये कभी नहीं होगा। हम आप लोगों के लिए इतने बड़े समुदाय को नाराज़ नहीं करेंगे। इतना कह कर अटल जी चले गए।

शिया डेलिगेशन से बैठने तक को नहीं कहा खड़े खड़े बात की और चले गए। ये थे हमारे अटल जी। अटल जी के इस रवय्ये से शिया ओलमा के डेलिगेशन को बहुत तकलीफ हुई और डा कल्बे सादिक़ साहब जिनको ग़ुस्सा बहुत कम आता है, उनकी नाराज़गी देखने वाली थी। इसके कुछ महीनो बाद अटल जी का एक दूत कल्बे सादिक़ साहब के पास आया कि अटल जी आपसे कुछ मुद्दों पर बात करना चाहते हैं। अगर आप राज़ी हों तो मीटिंग तय हो जाए। डा साहब ने उनके दूत से साफ़ कह दिया की पहले अटल जी उस रवय्ये के लिए हम लोगों से माफ़ी मांगी जो उन्होंने हम लोगो के साथ किया था उसके बाद ही आगे बात होगी। वो दूत नाराज़ हो कर चले गए और एक प्रेस कांफ्रेंस करके कल्बे सादिक़ साहब को बुरा भला कहा।

काफी साल तक यही हालात रहे फिर लखनऊ में ईद मिलन समारोह में लखनऊ के एक बुज़ुर्ग बीजेपी के नेता जो अटल जी के काफी करीब थे कल्बे सादिक़ साहब को न्योता देने आये तो सादिक़ साहब ने साफ़ मना कर दिया शिरकत करने के लिए ईद मिलन समारोह में। फिर उन बुज़ुर्ग नेता ने फ़ोन पर डा कल्बे सादिक़ साहब से अटल जी की बात कराई और उन्होंने खेद व्यक्त किया तब जा कर कल्बे सादिक़ साहब ईद मिलन समारोह में शरीक हुए।

डॉ कल्बे सिब्तैन ने लिखा कि इन सब बातों को मैंने क़रीब से देखा और सुना है इस लिए आज अवाम के सामने ये सच्चाई लिख रहा हूँ कि कुछ लोग जो ये अफवाह उड़ा रहे हैं कि अटल जी ने अज़ादारी के जुलूस उठवाये। हक़ीक़त ये है जो मैंने लिखी। बात ये है कि हर नेता चाहे वो किसी भी दल से हो सिर्फ नेता होता है और उसकी नज़र सिर्फ वोटों पर होती है। न वो किसी का मुखलिस होता है न हमदर्द। नेता सिर्फ नेता होता है। लाल बहादुर शास्त्री की तरह के ईमानदार नेता कभी कभी ही पैदा होते हैं

यह लेख डॉ कल्बे सिब्तैन नूरी की फेसबुक वाल से लिया गया है

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