क्या आज समाज में कर्बला के पहले जैसे हालात पैदा हो रहे हैं, जानिए इस लेख में

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क्या आपको पता है कर्बला का वाक़्या रुनुमा होने के पहले हालात कैसे थे। सिर्फ इतना ही नहीं था की यज़ीद शराब पिता था और बदकारी करता था, बल्कि यज़ीद ने एक ऐसा काम किया था जिससे समाज का ताना बाना ख़राब हो रहा था।

वह काम क्या था?

यज़ीद ने अपनी हुकूमत में ऐसा माहौल बनाया था की अगर कोई बुरा काम करता तो उसे रोकने टोकने वाले के दिल में खौफ रहता था की अगर कुछ खाएगा तो यज़ीद का कोई गुंडा मवाली आ कर तकलीफ न दे दे।

इसकी उलट अगर कोई किसी को नेकी का हुक्म करता या दीं की बात करता तो उसे खुद यज़ीद या उसके चेले चपाटे आ कर यह कहते की तुम अपनी ज़िन्दगी जिओ लेकिन दूसरों को ये सब नेकी मत सिखाओ। इससे माहौल खराब होता है। खामोश बैठ कर समाज में शांति बनाये रखो।

लेकिन जब कोई हसी, मज़ाक, तंज़, हत्ता की बुरी चीज़ भी समाज में शेयर करता तो उसे कोई रोकना तो दूर उसके खिलाफ आवाज़ तक उठाने की कोशिश नहीं करता था।

इसका सीधा मतलब था की अल्लाह के बताये हुए क़ानून जिसे ‘अम्र
बिल मारूफ व नहीं अनिल मुनकर’ कहा जाता है उसका उल्टा होने लगा था। जैसे ‘नसीहत बिल मुनकर व सुकूत बिल मारूफ’

अब ज़रा समाज में देखें:

* हम दूसरे को अच्छी बातों की तरफ दावत दे सकते हैं? या फिर हम पर मुल्ला, शना या बड़ी बड़ी बातें करने वाला जैसा टैग लगते हैं

*क्या समाज इस्लामी वैल्यूज से दूर नहीं जा रहा है ? ऐसा क्यों है की एक मोमिन किसी दूसरे मोमिन से दीं की बात नहीं कर सकता?

* क्या हमारे समाज के ओहदेदारों ने ऐसा माहौल तो नहीं बना दिया जहाँ क़ुरआन, दीं और अच्छी बाते करने को समाज में फसाद पैदा करना कहा जा रहा है?

* कही ऐसा तो नहीं की बुरी बातो पर एहि ओहदेदार खामोश रहते है और कोई एक्शन नहीं लेते?

* अगर ऐसा है तो फिर समझ लीजिये की आज के दौर में हमारे हालात वैसे ही है जैसे कर्बला के पहले यज़ीद ने बना दिए थे?

* हम पर ज़रूरी है की अगर हम ऐसे हालात देखे तो सच्ची का साथ देते हुए खड़े हो जाए और समाज में दीं को आम करे, अच्छे ओलेमा को समाज में लाए और समाज के ओहदो से (Positions se) बुरे और ख़राब लोगो को दूर रखे.

* अगर आज ऐसा नहीं करोगे तो कल हम देखेंगे की समाज से दीं गायब हो गया है और दीं के नाम पर सिर्फ रसूमात रह गई है और ऐसे समय में हमारी नस्ले (aulaad 👨‍👨‍👦‍👦) हमारे हाथ से जाने लगेगी और बच्चे माँ बाप की आँखों के सामने बुरे काम करेंगे लेकिन वालिदैन में ये ताक़त नहीं रहेगी की उन्हें रोक सके.

* जागिये.. इसके पहले की बुराई ख़त्म करने के लिए हमे ज़्यादा बड़ी क़ुरबानी देनी पद जाए !

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