कैदखाने में यह कहती थी सकीना भाई, इस सदा के साथ लखनऊ में हुआ “याद ए सकीना”

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कैदखाने में यह कहती थी सकीना भाई, जुल्म आदा ने किया हम पर यह कैसा भाई अंजुमन गुलजारे पंजेतन के साहबे बयाज दिलावर हसन ने जैसे ही यह नौहा पढ़ा छोटे इमामबाड़े में मौजूद हजारों की संख्या में अजादारों की सिसकियां बंध गईं।

इमाम हुसैन की चार साल की चहीती बेटी जनाबे सकीना की याद में अंजुमन गुलजारे पंजेतन की ओर से मोहर्रम के आखिरी रविवार को आयोजित होने वाला यादे सकीना रविवार को हुसैनाबाद स्थित छोटे इमामबाड़े में मनाया गया।

मजलिस में हजारों की संख्या में बुर्कापोश महिलाओं, स्याह लिबास पहने पुरुषों और बुजुर्गों ने शामिल होकर इमाम हुसैन की बेटी का गम मनाया। मजलिस में अजादारों को कैदखानए शाम के दिलसोज मंजर की जियारत कराई गयी, जिसे देख अजादारों की आंखें नम हो गयीं।

मजलिस के बाद अजादारों को तबर्रुकात की जियारत कराई गयी और मातमी अंजुमनों ने इमामबाड़ा परिसर में जुलूस निकाल नौहाख्वानी व सीनाजनी की।

अंजुमन गुलजारे पंजेतन की ओर से छोटे इमामबाड़े में हुई मजलिस को राजस्थान के अजमेर से आए मौलाना गुलजार हुसैन जाफरी ने खिताब किया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने जनाबे सकीना पर इमाम हुसैन की शहादत के बाद गुजरी मुसीबतें बयान की तो अजादार गमजदा हो उठे। मौलाना ने कैदखानए शाम में जनाबे सकीना की दर्दनाक शहादत का मंजर बयान किया तो अजादार खुद पर काबू न रख सके और जारो-कतार रोने लगे।

मजलिस के बाद अकीदतमंदों को कैदखानए शाम के दिलसोजनाक मंजर की जियारत करायी गयी, जिसे देख अकीदतमंद बेकरार हो उठे। इस मौके पर मातमी अंजुमन गुलामाने हुसैन, गुलदस्तए हैदरी, गुलजारे अहलेबैत, नैय्यरुल इस्लाम, शब्बीरिया, गुंचए मेहदिया और मकसदे हुसैनी ने नौहाख्वानी व सीनाजनी करते हुए इमामबाड़ा परिसर में जुलूस निकाला।

जुलूस में ताबूत, अलम, हजरत अली असगर की निशानी झूला (गहवारा), इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह आदि तबर्रुकात की जियारत कर अकीदतमंदों ने दुआएं मांगी।

इस दौरान जीशान आजमी ने जनाबे सकीना पर कर्बला से लेकर कैदखानए शाम तक गुजरी मुसीबतें बयान की तो अजादार खुद पर काबू न रख सके। इमामबाड़े में अलविदाई मजलिस को मौलाना जकी बाकरी ने खिताब किया।

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