मीर अनीस का एक और चश्मो चिराग़ आज देर रात गुल हो गया

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मशहूर व मारूफ राइटर व शायर अली अहमद दानिश का आज रात तक़रीबन 2 बजे ब्रेन हम्ब्रज से इंतेक़ाल हो गया उनकी तदफीन ऐशबाग स्थित करबला मलका जहां में बाद नमाज़े ज़ोहर होगी।

अली अहमद दानिश तक़रीबन 70 साल के थे और अज़ादारी को फ़रोग़ देने में अहम किरदार अदा करने वाले मीर अनीस की नस्ल के थे आपने कई विषयों पर लेख लिखने के साथ ही मदहे मोहम्मद व आले मोहम्मद अस में अशहार लिखना। मदह करने का अपनी खानदानी खिदमात को जारी रखा।

दानिश के इंतेक़ाल की खबर मिलते ही रात में ही उनके दोस्तों, अहबाब और चाहने वालों ने कसीर तादाद में कूचाए मीर अनीस स्थित उनके आवास पर पहुँच कर अपने ग़म का इज़हार करते हुए उनके पसमांदगान को ताज़ियत पेश की। पसमांदगान में अहलिया के अलावा दो बेटे और तीन बेटीयाँ हैं।

मीर अनीस के मिशन और उनकी याद को जारी रखने के लिए मीर अनीस मेमोरियल मिदहत कमेटी बनाकर लोगों को जोड़कर काम कर रहे थे और कमेटी के अध्यक्ष भी थे। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में मीर अनीस के वंशज की हैसियत से शामिल होकर सेमिनार की शोभा बढ़ाई इसी के साथ अपने लेखों और शेरों से भी काफी लोकप्रिय थे।

ऐसा सादा मिज़ाज की हर किसी के प्रिय थे और हर किसी के सुख दुख में शामिल रहते। दानिश के इंतेक़ाल पर इशरत लखनवी, सरवर तक़ी, ज़की भारती, साहेबा जरवली आदि ने शोक व्यक्त किया है।

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