इस माहे मुहर्रम में सोशल मीडिया पर इस बात का रखें ख़याल!

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माहे अज़ा मुहर्रम नज़दीक है और शिया समुदाय अज़ादारी के एहतेमाम में लग गया है। देश में मुहर्रम दो महीना 8 दिन मनाया जाता है और पुरे ख़ुलूस के साथ मजलिस ए शुहदा ए कर्बला बरपा की जाएगी।

लेकिन इस मुहर्रम हमे कुछ चीज़ों से सावधान भी रहना होगा। जैसे आपने पहले भी देखा होगा की सोशल मीडिया पर मुहर्रम और माहे रमज़ान के दिनों में लोगों के बीच बहस छिड़ी रहती है, ऐसे ही कुछ आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।

क्योंकि दीनी जज़्बात इन दिनों में ज़यादा होते हैं तो ऐसे में लोग सोशल मीडिया पर तरह तरह की पोस्ट डालते हैं। ज़यादातर लोगों का मक़सद अज़ा ए इमाम ए मज़लूम के पैग़ाम को आगे पहुंचना होता है लेकिन कुछ महज़ लोगों पर तंज़ कसने के लिए लिखते हैं।

दुश्मन बखूबी जानता है कि अगर शिया समुदाय को मरजईयत और अज़ादारी से दूर कर देंगे तो उनको पछाड़ना आसान होगा। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई फेक आईडी के ज़रिये आपस में बहस छेड़ने और लोगों को उकसाने का काम किया जाता रहा है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर कई सारे मामले सामने आये जिसमें लोगों के बीच तफरका फैलाने की कोशिश को देखा जा सकता है। जैसे लखनऊ में बंद पड़ी अज़ादारी को खुलवाने का मसला।

कुछ ही दिनों में अज़ादारी मूवमेंट को लेकर बहस का बाजार सोशल मीडिया पर गर्म हुआ और हर कोई अपने योगदान गिनवाने लगा। देखते ही देखते, लोगों में गरमा गर्मी शुरू हुई और एक दूसरे पर आरोप लगने लगे। यह हकीकत है कि अज़ादारी खुलवाने में उलमा और क़ौम के लोगों का बड़ा योगदान रहा है और किसी सियासी जमात का कोई लेना देना नहीं था।

इन सब से एक बात साफ़ ज़ाहिर है की दुश्मन को पता है की सोशल मीडिया पर शिया समुदाय के लोगों को उलझा कर रखना आसान है। लेहाज़ा कोशिश करें की सोशल मीडिया पर बहस में न पड़ें और अज़ादारी में ज़यादा फोकस करें।

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