मुसलमानों को आपसी विवाद भूलकर एक होने की ज़रुरत: मौलाना कल्बे जवाद

Share This News

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा की आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। आज लखनऊ में आयोजित हुई आतंकवाद के विरोध में शिया सूफी कॉन्फ्रेंस का अच्छा सन्देश पूरे देश में जायेगा।

डॉ दिनेश शर्मा आज मौलाना कल्बे जवाद के नेतृत्व में बड़े इमामबाड़े में आयोजित शिया सूफी एकता कॉन्फ्रेंस में सम्बोधित कर रहे थे।

डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि कॉन्फ्रेंस इस बात के जूनून को साबित करता है कि देश का अल्पसंख्यक अपने मादरे वतन के लिए कितना गंभीर है। मुसलमान क़ुरआन की शिक्षाओं पर अमल करता है।

उन्होने कहा कि हुसैनी वह है जो आतंकवाद का मुकाबला करता है और अपना सब कुछ मानवता पर न्योछावर कर देता है। यही वातावरण देश और प्रदेश की तरक़्क़ी और शांति का प्रतीक है।

डॉ शर्मा ने कहा कि अब्दुल कलम अखबार बेचते थे लेकिन देश के लिए उनके अंदर कुछ करने का जूनून था। उसी जूनून ने उन्हें मिसाइलमैन बनाया और फिर शांतिदूत बनते हुए राष्ट्रपति बने।

जंगे आज़ादी में मुसलमानों का ज़िक्र करते हुए कहा कि बहादुर शाह ज़फ़र अंग्रेज़ों का मुकाबला करने को खड़े हुए। सूफी संतों ने देश को रास्ता दिखाने का काम किया है। बेगुनाहों का कत्ल इस्लाम में मना है।

उन्होने नवाबीने अवध के दौर में राम लीला और ईदगाह का ज़िक्र करते हुए कहा की नवाब आसिफुद्दौला ने एक तरफ राम लीला तो दूसरी तरफ ईदगाह के लिए जगह दी थी। यही नहीं कई साल तक सरकारी ख़ज़ाने से राम लीला भी होती रही। लखनऊ ने आज पूरे देश को राह दिखाई है मुल्क का दुश्मन इधर देख नहीं सकता।

इस अवसर पर मौलाना कल्बे जवाद ने सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी धर्मों के धार्मिक स्थल ऐसे हैं जहाँ उसी धर्म के लोग जा सकते हैं लेकिन इमामबाड़े और खानकाहें ऐसी हैं जहां हर धर्म का व्यक्ति मिल जाता है। अगर मुस्लिमों के सभी मसलका एक हो जाएँ तो उनकी मिसाल समुद्र की तरह बन जाएगी जैसे सभी नदियाँ एक होकर समुद्र बनती हैं और उनका मुकाबला कोई नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि यही मुसलमानों का हो सकता है सभी मसलक के लोगों को आपसी विवाद भूलकर एक होने की ज़रुरत है। उन्होने 10 सूत्रीय प्रस्ताव भी पढ़ कर सुनाया जिसमे मुख्या रूप से इराक़ में दहशतगर्दों द्वारा क़त्ल किये गए 39 भारतियों की हत्या की निंदा की गयी, शिया सूफी को आबादी के हिसाब से केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों में प्रतिनिधित्व देने, बेगुनाहों के क़त्ल की निंदा, वक़्फ़ सम्पत्तियों की सुरक्षा और उसमे भ्रष्टाचार की जांच करने के साथ ही शिया वक़्फ़ बॉर्ड के चेयरमैन और सदस्यों के आपराधिक कार्यों की जांच करने, शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए विशेष पैकेज और सऊदी अरब में धार्मिक स्थल व रौज़ों जो गिरा दिए गए हैं उनके पुराननिर्माण आदि के प्रस्ताव मंज़ूर किये गए।

इमरान सिद्दीकी ने सम्बोधित करते हुए कहाँ कि इस्लाम को खतरा उनलोगों से है जो विरोधी ताक़तों के इशारे पर काम कर रहे हैं। जहां इस्लाम होगा वहां आतंकवाद बिलकुल भी नहीं हो सकता आशिक़े रसूल के अंदर की बुराई खत्म हो जाती है उन्होंने कहाँ की अमेरिका इसराइल और उसके समर्थित संगठनों से हुसैनी जज़्बे के साथ लड़ा जा सकता है।

कॉन्फ्रेंस का आगाज़ तिलावते क़ुरआन मजीद से क़ारी मासूम ने किया और मौलाना सईद अख्तर जाफरी ,मौलाना सब्बीर वारसी कोलकाता ,मौलाना मशहूद अली क़ादरी , वकास वारसी , कोलकाता से आये शब्बीर वारसी ,मौलाना जाबिर जौरासी , आदि मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *