जब नाना ने हिजरत की तो दीन ए इलाही फैला और जब नवासे ने हिजरत की तो दीन ए इलाही बचा: मौलाना सईदुल हसन

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28 रजब वह अज़ीम तारिख है जिस दिन आज़ादी व इंसानियत के अलम्बरदार इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) मदीने से मक्के की तरफ हिजरत फ़रमाई। हिजरत एक ऐसे इलाही कानून है जो इंसान की इब्तेदा से लेकर अब तक इंसान की तरक्की और कमाल के लिए सीरत ए के उन्वान से पेश किया गया है।

28 रजब के मौके पर मौलाना सईदुल हसन नक़वी ने ShiaNews.in से बात करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि इसी पर अमल करते हुए इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) ने क़याम फ़रमाया और दीन ए इलाही, अख़लाक़ व इंसानियत की हिफाज़त फ़रमाई। जब नाना ने हिजरत की तो दीन ए इलाही फैला और जब नवासे ने हिजरत की तो दीन ए इलाही बचा। कल भी इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) ज़ालिमों के खिलाफ क़याम की एक आवाज़ थे और आज भी इमाम हुसैन (अस) का रौज़ा आज़ादी और इन्साफ की अलामत है।

मौलाना ने कहा कि आज जब दुनिया के यज़ीदों ने दाएश (ISIS) जैसे लोगों को इस्तेमाल करने की कोशिश की और अपने इस्तेमारी मसूबों को अमली जामा पहनना चाहा तो आज इमाम हुसैन (Imam Husain) का ही यह रौज़ा था जिसने शाम और इराक को ज़ालिम इस्तेमारी ताक़तों के हर हथकंडे से नजात दी व बताया के कर्बला हर दौर की ज़रुरत का नाम है।

सही कहा था इमाम हुसैन (अस) (Imam Husain) ने की ‘मुझ (इमाम हुसैन) जैसे उस (यज़ीद) जैसे की बायत नहीं कर सकता है।’

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