जानिए क्या, नाटो ने रूस पर लगाया एक और इलज़ाम?

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नेटो की सैन्य कमेटी के अध्यक्ष जनरल पावेल ने दावा किया कि इस संगठन के सदस्य देशों अमरीका, जर्मनी, फ़्रांस और चेक गणराज्य के आतंरिक मामलों में रूस के हस्तक्षेप के कई मामलों की सूचना मिली है।

पावेल ने कहा कि रूस की पैठ में वृद्धि के साथ स्वाधीन देशों के आंतरिक मामलों में मॉस्को का हस्तक्षेप चिंता का विषय है।

अमरीका के 2016 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में रूस के हस्तक्षेप के इल्ज़ाम के बाद हालिया कुछ वर्ष में एक विषय बार बार उभर कर आया वह योरोपीय देशों के चुनाव सहित आतंरिक मामलों में मास्को के कथित हस्तक्षेप का विषय है। रूस ने इन इल्ज़ाम को रद्द किया है।

रूसी विदेश मंत्री सिर्गेई लावरोफ़ ने अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव, ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह सहित दूसरे देशों के मामलों में हस्तक्षेप के बारे में मॉस्को के ख़िलाफ़ इल्ज़ाम की ओर इशारा करते हुए बल दिया कि इन दावों को साबित करने वाले कोई सुबूत नहीं हैं।

टीकाकार पॉल शरीकोफ़ का मानना है कि अमरीका-रूस के द्विपक्षीय संबंधों में कड़ुवाहट का कारण यह है कि रूस का विषय अमरीका के भीतर राजनैतिक द्वंद्व का विषय बन गया है।

रूसी मामलों के विशेषज्ञ रजब सफ़ारोफ़ के अनुसार, अमरीका की मुख्य समस्या रूस नहीं बल्कि पूतिन है। क्योंकि अमरीका को लगता है कि अगर पूतिन न होंगे तो रूस से आसानी से समझौता हो सकता है।

रूस में 18 मार्च को राष्ट्रपति पद के चुनाव के मद्देनज़र, नेटो सहित पश्चिम, मॉस्को पर इल्ज़ाम लगाकर उसके ख़िलाफ़ नई पाबंदियों का औचित्य पेश करना चाहता है और रूस में अस्थिरता, अशांति व जनविरोध बढ़ाने के लिए पश्चिम का हस्तक्षेप भी तेज़ हो गया है।

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