जिसका जिसका मैं मौला उसका अली (अस) मौला, पढ़िए ग़दीर ए खुम का पूरा खुतबा

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ईदे ग़दीर मोमिनों के लिए बहुत बड़ी ईद है बल्कि इस्लाम की सारी ईदों में सबसे सर्वश्रेष्ठ (अफ़ज़ल) है और अल्लाह तआला की निगाह में उसका महत्व ईदुल फ़ित्र और ईदुल अज़्हा से भी ज़्यादा है। इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः ईदे ग़दीर मुसलमानों की सबसे महान और बड़ी ईद है और वह अठ्ठारह ज़िल्हिज्जा को है। 18 ज़िलहिज्जा सन दस हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने अल्लाह तआला के हुक्म पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।

आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ग़दीरे ख़ुम नामक जगह पर एक लाख बीस हज़ार हाजियों के बीच एक ख़ुत्बा या भाषण दिया और उसके बाद उसी जगह पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम की जानशीनी (उत्तराधिकार) का ऐलान किया।ग़दीर का संदेशपैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने २३ साल तक इलाही मैसेज को पहुंचाने की लगातार कोशिशों के बाद कहा था कि अल्लाह तआला का संदेश पहुंचाने में किसी भी इलाही पैग़म्बर को मेरी तरह सख़्तियाँ और कठिनाइयां सहन नहीं करनी पड़ीं।

अपनी पाक उम्र के आख़री साल और अपने ज़िंदगी के आख़िरी हज से वापसी पर अल्लाह तआला के हुक्म के अनुसार पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने एसे इंसान को अपना उत्तराधिकारी निर्धारित किया जिसने अपने इल्म, व्यवहार, बहादुरी, ख़ुलूस व निष्ठा और बहुत से दूसरे अच्छे गुणों से कई बार यह साबित कर दिया था कि उनके भीतर पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का उत्तराधिकारी बनने की पूर्ण क्षमता पाई जाती है।

कहते हैं कि अपने समय के मुनाफ़िकों और मिथ्याचारियों की ताक़त तथा हज़रत अली अलैहिस्सलाम के संबन्ध में उनके कीने (द्वेष) के कारण पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम हज़रत अली को अपना जानशीन (उत्तराधिकारी) घोषित करने में संकोच कर कर रहे थे लेकिन क़ुरआन की आयत इस बात की गवाह है कि अल्लाह तआला ने उन्हें अपने जानशीन के ऐलान पर मजूबर किया। पाक क़ुरआन में अल्लाह तआला कहता है कि ऐ पैग़म्बर! उस संदेश को पहुँचा दीजिये जो आपके अल्लाह की ओर से आप पर नाज़िल हो चुका है और अगर आपने ऐसा न किया तो यह ऐसा है जैसे आपने इलाही संदेश पहुंचाने का कोई काम अंजाम ही नहीं दिया। अल्लाह लोगों से आप की रक्षा करेगा। हज से वापसी पर पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ग़दीरे ख़ुम नामक जगह पर हुक्म दिया कि जो लोग यहां तक नहीं पहुंचे हैं उनके आने की इतेज़ार की जाए और जो लोग आगे निकल गए हैं उनको वापस बुलाया जाए। जब अधिकतर हाजी उस जगह पर इकठ्ठा हो गए जिनकी संख्या एक लाख बीस हज़ार बताई गई है, तो ऊंटों के पालानों से पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के लिए मिम्बर बनाया गया। आप (स.) मिम्बर पर गए और आपने बड़े ही मनमोहक ढंग से अल्लाह तआला की तारीफ़ करते हुए एक स्पीच दी।

उसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने लोगों को संबोधित करते हुए हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी निर्धारित किया। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वह लोग जो यहां पर मौजूद हैं और इस संदेश को सुन रहे हैं उनके लिए वाजिब (अनिवार्य) है कि अपने वतन पहुंचने पर इस संदेश को अपने इलाक़े के लोगों तक पहुंचाएं। उसके बाद उन्होंने अपने अहलेबैत अ. (परिजनों) को पाक क़ुरआन के बराबर बताया और कहा कि क़यामत के दिन तक वह दोनों साथ ही रहेंगे। पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने पाक क़ुरआन और अपने अहलेबैत को मुसल्मानों के कल्याण का रास्ता बताया। इस घटना के कुछ समय के बाद पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. बीमार हो गए और कुछ दिनों के बाद आप स. इस दुनिया से चले गए।

अब पैग़म्बर सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के उत्तराधिकारी, जिनका प्रशिक्षण पैग़म्बरे इस्लाम ने किया था और जो इस्लाम लाने में सबसे आगे रहे और जिन्हें पाक क़ुरआन का पूरा इल्म था पैग़म्बर की उम्मत या समुदाय के भविष्य को लेकर चिन्तित हैं। ग़दीर का ख़ुत्बाःलोगों को संबोधित करते हुए पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने अपनी स्पीच इस तरह से शुरू कीः सारी तारीफ़ें और गुणगान अल्लाह तआला के लिए है। हम उसी से मदद चाहते हैं, उस पर विश्वास रखते हैं और उसी पर हमें भरोसा है। हम अपनी बुराइयों और बुरे कामों से मुक्ति पाकर उसकी पनाह हासिल करने की दुआ करते हैं। भटके हुए लोगों के लिए उसके अलावा कोई पथप्रदर्शक और रहनुमा नहीं है और जिसका वह मार्गदर्शन कर दे उसे कोई रास्ते से भटका नहीं सकता। मैं गवाही देता हूं कि उसके अलावा कोई इबादत के योग्य नहीं है और मोहम्मद (स.) उसके बंदे और पैग़म्बर हैं। अल्लाह तआला के गुणगान तथा उसकी वहदानियत (एक होने) की गवाही के बाद ऐ लोगो! मैं यह बताना चाहता हूं कि सारी चीज़ों के जानने वाले दयावान अल्लाह ने मुझे यह ख़बर दी है कि मेरी उम्र के दिन पूरे हो चुके हैं तथा मैं बहुत जल्द ही अल्लाह तआला की दावत को क़ुबूल करके हमेशा बाक़ी रहने वाली दुनिया की तरफ़ कूच करने वाला हूं।

हम और आप अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने के लिए जवाबदायी हैं। आपका इस बारे में क्या विचार और कहना है? मौजूद लोगों ने जवाब दिया कि हम गवाही देते हैं कि आपने संदेश पहुंचाने और अपनी ज़िम्मेदारी के निभाने में कहीं कोई कसर बाक़ी नही रखी। अल्लाह तआला आपको सबसे अच्छा बदला दे। पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने कहा कि क्या आप लोग गवाही देते हैं कि अल्लाह तआला एक है जिसका कोई समकक्ष नहीं और मोहम्मद (स.) उसके बंदे तथा पैग़म्बर हैं और यह कि जन्नत, जहन्नम, मौत और क़यामत यक़ीनी और निश्चित चीज़ें हैं जिनमें कोई शक व संदेह नहीं है और यह कि अंततः अल्लाह तआला मरे हुए लोगों को दोबारा ज़िंदा करेगा? सबने एक आवाज़ होकर जवाब दिया कि बिल्कुल हम इन तथ्यों और सच्ची बातों की गवाही देते हैं। पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने कहाः ऐ अल्लाह तू गवाह रहना।

इसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम स,अ. ने एक बार फिर कहा कि क्या आप लोगों ने मेरी बात अच्छी तरह सुन ली? सबने जवाब दिया है कि हां ऐ अल्लाह तआला के पैग़म्बर। फिर पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ.) ने कहा कि निश्चित रूप से मैं दूसरे जहान की ओर रवानगी तथा हौज़े कौसर पर पहुंचने में आप सबसे आगे रहूंगा इस हौज़ की चौड़ाई सनआ और बुसरा के बीच की दूरी के बराबर है। उसके भीतर सितारों की संख्या के बराबर चांदी के जाम और प्याले हैं। देखता हूं कि आप लोग उन दो क़ीमती चीज़ों (क़ुरआन व अहलेबैत) के साथ क्या बर्ताव करते हैं जो मैं आपके बीच छोड़कर जा रहा हूं? इसी बीच वहां बैठे लोगों में से एक ने कहा कि ऐ अल्लाह तआला के पैग़म्बर! वह दो क़ीमती और महत्वपूर्ण चीज़ें क्या हैं? पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. ने कहा कि उन मूल्यवान चीज़ों में एक क़ुरान है जो अल्लाह तआला और इंसानों के बीच संपर्क का माध्यम है। इसलिए उसे मज़बूती से पकड़ लीजिए ताकि सही रास्ते से भटक न जाएं। दूसरी अहेम चीज़ मेरे अहलेबैत है। अल्लाह तआला ने मुझे अवगत करा दिया है कि यह दोनों चीज़ें एक दूसरे से कभी भी अलग नहीं होंगी यहां तक कि मेरे पास हौज़े कौसर पर पहुंच जाएंगी। मैंने हमेशा अल्लाह तआला से दुआ की है कि क़ुरआन और मेरे अहलेबैत के बीच कभी जुदाई न हो। इसलिए आप लोग उनसे आगे बढ़ने की कोशिश न कीजिए और उनके अनुसरण से इन्कार न कीजिए।इसके ब

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