रौजए काजमैन में मनाया गया जश्ने कायम, शायरों ने पेश किये कलाम

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शिया मुसलमानों के बारहवें और आखिरी इमाम, इमामे अस्र के जन्मदिन की खुशी में महफिल-मीलाद और नज्र-नियाज का सिलसिला शहर में जारी है। इमाम के जन्मदिन की खुशी में तंजीमे जाफरी की ओर से शनिवार को जश्ने कायम का आयोजन किया गया।

सआदतगंज के रौजए काजमैन में आयोजित जश्ने कायम में देश-विदेश सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए शायरों ने बारगाहे इमामत में अपना नजराना पेश किया।

रात 9 बजे तिलावते कलामे पाक से महफिल का आगाज कारी युसूफ मिर्जा ने किया, जिसके बाद मौलाना उरुजुल हसन मीसम ने महफिल को खिताब किया। महफिल को खिताब करते हुए मौलाना ने इमाम के जन्म और उनकी गैबत पर रोशनी डालते हुए गैबते इमाम में शियों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से रोशनी डाली। मौलाना ने कहा कि जब इमाम की गैबत खत्म होगी और इमाम जाहिर होंगे तो अन्याय और अत्याचार से कराह रही दुनिया न्याय और शंाति से बिल्कुल उसी तरह भर जाएगी, जिस तरह अन्याय और अत्याचार से भरी होगी।

महफिल की अध्यक्षता करते हुए मौलाना शोजब काजिम जरवली ने इमाम की गैबत और उनकी विशेषताओं पर रोशनी डाली। उलमा के खिताब के बाद महफिले मकासिदा का आगाज हुआ, जिसमें दुबई से आए नजीर आब्दी, हैदराबाद के आगा सरोश, मंजर भोपाली, रजा सिरसवी, नायाब हल्लौरी, डॉ. एैनुल हसन, खादिम शब्बीर नसीराबाद, डॉ. मजहर सईद बहराइची, मीसम गोपालपुरी, बेताब हल्लौरी, अख्तर सिरसवी, रोशनी बनारसी, शबरोज कानपुरी सहित अन्य शायरों ने बारगाहे इमामत में अपना नजराना पेश किया। तंजीम के चेयरमैन मौलाना शोजब काजिम जरवली, सचिव मोहम्मद हैदर रिजवी व सदस्यों ने महफिल में आए लोगों का शुक्रिया अदा किया।

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