वो सात आसमान कौन से हैं जिनका तज़किरा क़ुरआन और नहजुल बलाग़ाह में है?

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सात आसमानों का तज़किरा क़ुरआन और नहजुलबलाग़ाह दोनों में मिलता है! अल्लाह ताला क़ुरआन में कहता है के हमने तह बर तह साथ आसमान बनाए! वो सात आसमान कौनसे हो सकते हैं आइए हम इसका जाएज़ा लेते हैं! मैं आपको इस पर गुफ़्तुगू करने से पहले ये बता चलूँ के वो सात आसमान Parallel Universe भी हो सकते हैं!

  1. ज़मीन की मक़नातीसी हुदूद (पहला आसमान)
    Electromagnetic Field (EM Field) of Earth
    इस आसमान की मिसाल हम अपनी ज़मीन से दे सकते हैं ज़मीन की निचली सतह (land) एक ठहरी हुई मौज के मानिंद लगती है और ऊपरी सतह एक महफ़ूज़ छत! ये महफ़ूज़ छत क्या है आइए हम इसका जाएज़ा लेते हैं! हमारी ज़मीन के चारों तरफ एक बहुत मज़बूत इलेक्टोमैग्नेटिक फील्ड मौजूद है जो सूरज से आने वाली ख़तरनाक शुवाओँ (harmful radiations) से हमारी हिफ़ाज़त करती है! जब सूरज में न्युक्लिआई रिएक्शन्स तेज़ हो जाती हैं तो इससे कई कई लाख किलोमीटर लम्बी आग की लपटें (solar flares) पैदा होती हैं जिसकी वजह से इससे बहुत ही ख़तरनाक किरणें ख़ारिज होती हैं जिसमे सोलर प्लाज्मा व highly energized charged particles होते हैं! इसे हम coronal mass ejection (CME) कहते हैं! जब ये CME किरणें ज़मीन के Atmosphere (Magnetosphere) से टकराती हैं तो ज़मीन के चारों तरफ़ मौजूद इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ़ील्ड इन्हें रोकती है और हमारे atmosphere को पार नहीं करने देती और वापस स्पेस में भेज देती हैं! लेकिन फिर भी हम इसके असर को Aurora या Northern Lights के रूप में Observe कर सकते हैं! अगर ज़मीन के चारों तरफ ये पॉवरफुल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ़ील्ड न हो तो ये किरणें ज़मीन की हर शए को चन्द पलों में में जलाकर ख़ाक कर देंगी जिससे की ज़मीन पर ज़िन्दगी का वुजूद ख़त्म हो सकता है! ज़मीन की इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ़ील्ड को हम एक महफ़ूज़ छत बोल सकते हैं! ज़मीन से लेकर इस छत का न तो कोई सतून है जो इसे सहारा दे सके और न कोई बंधन जो उसे जोड़ सके लेकिन फिर भी वो हमारी ज़मीन के चारों तरफ मौजूद है! क्या ये ख़ुदा की अज़ीमुश्शान तक़लीक़ और उसकी वहदानियत की दलील नहीं है के उसने बिना किसी सहारे के जिसपर वो टिकी हुई हो इतनी महफ़ूज़ छत को हमारे ऊपर ढाँप दिया ताकि हमारा वुजूद बाक़ी रहे!
  2. निज़ामे शमसी का क़लाई मैदान जो चारों तरफ से ताक़तवर मक़नातीसी क़ूव्वत से घिरा हुआ है! (दूसरा आसमान)
    Heliosphere Combined with Heliopause of our solar system surrounded by a massive spherical shield
    इस आसमान की हद सूरज व हमारे निज़ामे शम्सी के आख़िरी सय्यारे से लेकर स्पेस के उस मुक़ाम तक है जहाँ हमारे सूरज की मैग्नेटिक फ़ील्ड काम करना बंद कर देती है और ये किसी भी चीज़ पर अपना असर नहीं करती है! या यूँ समझें के स्पेस का वो मुक़ाम जहाँ सूरज की ग्रेविटेशनल फील्ड ख़त्म हो जाती है! हाल ही में नासा के स्पेस क्राफ़्ट (क़लाई जहाज़) Voyager (वॉयजर) और Cassini (कसीनी) की दरयाफ़्तों से पता चला है के हमारे निज़ामे शम्सी (Solar System) के चरों तरफ एक ताक़तवर Spherical shaped Magnetic Field मौजूद है जो बाहरी क़ला (Outer Space या interstellar Space) से आने वाली ख़तरनाक रेडिएशन्स और कॉस्मिक रेज़ से हमारी हिफाज़त करती है! वॉयजर-1 और वॉयजर-2 स्पेसक्राफ़्ट हमारे सूरज से 20.6 बिलियन किलोमीटर दूर जा चुके हैं और ये अभी Heliosphere में ही हैं जोकि अभी भी सूरज की मैग्नेटिक फ़ील्ड की हुदूद में है और जहाँ तक solar wind के ज़रिये energized charged particles पहुँचते हैं! नासा के साइंसदानों का मानना हैं के वॉयजर स्पेसक्रॉफ्ट्स में सन 2020 तक काफ़ी इलेक्ट्रिकल सप्लाई मौजूद है जिससे के इसके सारे instruments काम करते रहेंगे! इसके बाद साइंसदान पॉवर सप्लाई की बचत के लिए एक एक करके इसके instruments turn off करना शुरू कर देंगे और सन 2025 तक इसका आख़िरी instrument बंद कर देंगे! इसके कुछ और साल बाद तक हमे वॉयजर स्पेसक्रॉफ्ट्स से सिग्नल और डेटा मिलते रहेंगे और उसके बाद ये कोई भी जानकारी भेजना बंद कर देंगे लेकिन ये रुकेंगे नहीं बल्कि कला की असीम गहराईयों में हमेशा चलते रहेंगे! सूरज से Heliopause region की दूरी 22 बिलियन किलोमीटर है और आने वाले 10-15 साल में वॉयजर स्पेसक्राफ़्ट्स हमारे निज़ामे शम्सी की इस आख़िरी दहलीज़ Heliopause को पार करके Intersteller space (क़ला) की असीम गहराईयों सदा के लिए गुम हो जायेंगे! वॉयजर-1 को अभी इस आसमान जिसकी हद Heliopause तक है, को पार करने में 15 साल लगेंगे! पॉवर सप्लाई बंद होने के बाद भी ये ज़मीन के ख़ामोश सफ़ीर (Silent Ambassadors) की तरह एक अनजान दुनियाँ और अनजान रास्तोँ पर मुसलसल चलते रहेंगे और 40,000 साल में Voyager-1 स्पेसक्राफ्ट हमारे सूरज से सबसे नज़दीक सितारे अल्फ़ा सेंचुरी (Alpha Centauri) तक पहुँच जायेगा जोकि सूरज से 1.6 नूरानी साल (1.6 Light Years) यानि 15 ट्रिलियन किलोमीटर (15,000,000,000,000 किमी) के फ़ासले पर है! वॉयजर स्पेसक्रॉफ्ट्स को 1977 में क़ला में भेजा गया था और तब से अब तक ये स्पेस में आगे बढ़ रहे हैं!
  3. हमारी कहकशाँ का क़लाई मैदान जिसमे ताक़तवर मैग्नेटिक फ़ील्ड मौजूद है जिसका महूर कहकशाँ के मरकज़ की तरफ है! (तीसरा आसमान)

Spatial Field of our Galaxy (Milky way); The strong magnetic field directed towards the center of Galaxy.

  1. कहकशाओं के झुरमुट; (चौथा आसमान)
    The clusters of Galaxies;
    कहकशाओं के इस झुरमुट में हज़ारों और करोड़ों कहकशाओं होती हैं जोकि बहुत ताक़तवर मैग्नेटिक फ़ील्ड या ग्रैविटेशनल फ़ील्ड से आपस में जुड़ी हुई हैं! इस आसमान में हमारी कहकशाँ समेत करोड़ों कहकशायें मौजूद हैं!
  2. फैलती हुई काएनात के क़लाई मैदान (क़लाई वुसअतें) (पाँचवाँ आसमान)
    The Spatial field of expanding universe which shows that galaxies are moving apart from each other towards the infinite borders of the universe.
    फैलती हुई काएनात के इन क़लाई मैदानों को हम पांचवा आसमान कह सकते हैं जो ये साबित करता है के काएनात में मौजूद सारी की सारी कहकशायें आपस में एक दूसरे से दूर भाग रही हैं और मुसलसल मूव कर रही हैं!
  3. मुतावाज़ी काएनात या जहाँ पर दूसरे क़वानीन-ए-फ़ितरत हैं (छठा आसमान)
    The parallel universe or multiverse with different sets of physical laws.
    क्या आपके जैसा कोई शख़्स या आपकी हूबहू कॉपी किसी दूसरी काएनात (Parallel Universe) में इस वक़्त मौजूद है तो ये जानकर आपको कैसा लगेगा? सदी के मशहूर साइंसदान स्टीफ़न हाकिंग ने मरने से पहले अपने आख़िरी पेपर्स में जो मई के पहले हफ्ते में ही पब्लिश हुए है में Parallel Universe या Multiverse के बारे में कुछ हैरत-अंगेज़ इंकिशाफ़ किये हैं और इस समझने के लिए एक नई थ्योरी propose की है जिसे हम “No Boundary Theory” भी कहते हैं! दोस्तों ये पोस्ट ज़्यादा लम्बा न हो जाए इसलिए इसके बारे में मैं आपको फिर बताऊँगा और इस मौज़ू पर तफ़सील से गुफ़्तुगू करूँगा!
  4. Outer space which encompasses all Universes (multiverse), possibly a world of extra-dimensions where all known physical laws would breakdown. This portion of the universe of universes is unknown and beyond our understandings. (सातवाँ आसमान)
    ये काएनात की वो हद है जहाँ तक शायद इंसान कभी नहीं पहुँच पायेगा क्यूंकि वहां पर हमारी काएनात के तमाम उसूल और laws बेकार हो जाते हैं और हम कभी भी उसे अपनी काएनात के मौजूदा उसूलों की बुनियाद पर नहीं समझ सकते हैं! ये वो मुक़ाम है जो इंसान की समझ से बहुत परे है और जिसे समझ पाना हमारी सोंच और फ़िक्र के दायरों से कहीं बढ़कर है जिसका तसव्वुर इंसानी दिमाग़ कर भी नहीं सकता है!

हज़रत अली का नहजुल बलाग़ह में इरशाद है के अल्लाह ताला ने एक ख़ास तरह के झागों से जिसे हम साइंस की ज़ुबान में क्वाण्टम फ़ोम कहते हैं, सात आसमान बना दिए! जिसकी निचली सतह ठहरी हुई मौज के मानिंद थी! वो कौनसी सतह है जो ठहरी हुई मौज के मानिंद है सइंसदान अभी तक दरयाफ़्त नहीं कर पाए हैं शायद ये कोई Extra Dimension है जिसके बारे में फ़िलहाल हमे नहीं मालूम है! और ऊपर वाला हिस्सा मेहफ़ूज़ छत जिसे अल्लाह ने इस तरह से क़ायम किया के न इसका कोई सतून था जो सहारा दे सके और न कोई बंधन बज़ाहिर जो उसे जोड़ सके इसकी मिसाल हम लामहदूद काएनात से दे सकते हैं के इसका कोई सतून या सिरा नहीं है जिसपर ये टिकी हुई हो और न कोई बंधन है जो उसे रोके हुए या जोड़े हुए है और न हम उसको नाप सकते हैं! वो लामहदूद है जिसकी मंज़िल तक रसाई मुमकिन नहीं है! अल्लाह ने इन आसमानों को सितारों की ज़ीनत और रोशन तारों की चमक से आरास्ता कर दिया और इनके दरमियान चाँद सितारों को लटका दिया! मौला अली का ये जुमला बहुत हैरतअंगेज़ है क्यूंकि वो कहते हैं के अल्लाह ने आसमानों (काएनात) में चाँद सितारों को लटका दिया मतलब ये के ये सभी चाँद सितारे क़ला में ग्रेविटी की वजह से ही लटके हुए हैं अगर ग्रेविटी नहीं हो तो ये अपने दायरों से हट कर क़ला में दूर भाग जायेंगे! ये सारे सितारे व ज़मीन एक घूमने वाले फ़लक (Accelerating galaxies) चलती फिरती छत (Expanding Universe) में हैं! हम जानते हैं की हमारी कहकशाँ अपने axis पर rotate कर रही है साथ ही इसमें मौजूद ज़मीन समेत सारे सितारे rotate कर रहे हैं और large scale पर काएनात में मौजूद अरबों कहकशायें (Billions of Galaxies) फैलती हुए काएनात (चलती फिरती छत) में आगे बढ़ रही हैं!

आख़िर में बस इतना कहूँगा के हममे से ज़्यादातर इंसान अपने आस-पास क़ुदरत की चीज़ों को देखकर हैरतज़दा नहीं होते हैं क्यूंकि हमें लगता है के ये कोई अजब करिश्मा या मज़ाहिरे क़ुदरत नहीं है! लेकिन अगर ये सब चीज़ें अचानक से कभी हमारे सामने आई होती तो हमें ज़रूर ये कोई अजूबा मालूम पड़ता! बस यही फ़र्क़ है उन ज़ेहनों में जो ग़ौर-ओ-फ़िक्र करते हैं और जो बस रटी-रटाई बातों पर अमल करके समझते हैं के उन लोगों ने इस दुनियां में आने की अपनी हुज्जत तमाम कर दी! दीन का मतलब सिर्फ़ कलमा पड़ने और सजदे करने से नहीं है बल्कि नेक अमल करने से है! वो दीन ही क्या जो बस ज़ुबान से क़ुबूल किया गया हो या अपने बड़ों को करते देखा हो तो हम भी करने लगे हों! दीन का मतलब इसे समझना है और समझकर अमल करना है इसीलिए क़ुरआन और अहले-बैअत ने बार-बार इल्मो-अमल को दावत दी है और अपने अमल से एक मिसाल पेश की है! लेकिन हम कौनसी मिसाल पेश कर रहे हैं ये सोंचने वाली बात है? दीन को फ़िज़ूल की रसूमात में शामिल करके उन रस्मों को दीन का हिस्सा मानने वाले दरहक़ीक़त बहुत क़सारे में हैं!

इस लेख को सैय्यद अली अख़्तर आबिदी की फेसबुक वाल से लिया गया है

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