समाज की खराबियों को सही करने की ज़िम्मेदारी मिम्बर पर बैठने वाले को लेनी होगी: मौलाना अख्तर अब्बास जौन

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इमामबारगाह डॉ आग़ा और इमामबारगाह झाऊलाल में मजलिस पढ़ते हुए मौलाना अख्तर अब्बास जौन ने कहा कि हमारा मेयार हक़ होना चाहिए। जैसे इमाम हुसैन (अस) से उनके बेटे हज़रत अली अकबर ने दौरान ए सफर सवाल किया था कि ‘बाबा क्या हम हक़ पर हैं।’ यहाँ आप देखिए कि हक़ पसंदी का मेयार क्या था, बात सिर्फ हक़ के रास्ते की हो रही थी।

उन्होंने कहा कि क़ौम के हालात खराब हैं, बेरोज़गारी, तलाक़, घरेलू झगड़े बढ़ रहे है और जवानों का अख़लाक़ खराब हो गया है लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नही है। यह ज़िम्मेदारी मिम्बर पर बैठने वाले कि है की वह इन मामलों में हक़ बयान करके क़ौम के हालात को सही करें।

मौलाना ने कहा की आज मिम्बर पर गंभीरता के अलावा मज़ाक व तफरी जारी है। इस्लाम संजीदा मज़हब है यहां तफरी की जगह नही है। इसकी मिसाल हमे कर्बला में देखने को मिलती है जहाँ इस्लाम बचाने के लिए इमाम हुसैन (अस) ने अपने घर व असहाब के साथ सबसे बड़ी क़ुरबानी दी थी।

उन्होंने कहा कि हमें अपने समाज में ऐसे हालात पैदा करने चाहिए कि लोगों को हमारे जुलूसों में शिरकत करने से रोका ना जाए। आज के समय में जुलूसों के दौरान बैरीकेडिंग लगाकर लोगों को आने से रोका जाता है। सवाल यह नहीं है कि उन्हें क्यों रोका जाता है बल्कि सवाल यह है कि ऐसे हालात क्यों बनाएं कि लोगों को रोका जा रहा है। इमाम हुसैन महज़ शियत तक महदूद नही है बल्कि हर क़ौम अलग अलग तरीके से इमामे मजलूम का गम आज भी मनाती है।

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