क्या हम मुहर्रम में इन अहम बातों पर गौर करेंगे, जानिए शेख जफ़र लदक की ज़ुबानी

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मुहर्रम महीने के यह पहले दस दिन बेजोड़ हैं! हर साल, दुनिया का सबसे बड़ा, दस दिन लम्बा सम्मेलन! पर अहमियत इस बात की है कि आप इन दस दिनों में क्या करेंगे!

सोचता हूँ, कितने नौजवान होंगे जो इन दस दिनों को सिर्फ़ एक दूसरे की मुहर्रमी रसमों और रवाजों पर तानें और गालियाँ देने में इसतमाल करेंगे, ना कि मुहर्रम के सुधार के संदेश पर अमल करने में!

सोचता हूँ, कितने आलिम होंगे जो मिमबरों से अपने इमाम हुसैन (अ.स) पर हुए ज़ुल्मों को याद कर लोगों को रुलाएँगे, पर उन मुहर्रमी मिमबरों पर बैठ कर फ़िलिस्तीन, यमन, पाकिस्तान, नाइजीरिया या बर्मा के लोगों पर हो रहे ज़ुल्मों का एक बार भी ज़िक्र तक नहीं करेंगे!

सोचता हूँ, कितने मर्द होंगे जो बीबी ज़ैनब (स.अ), बीबी उम्मे कुलसूम (स.अ) और बीबी सकीना (स.अ) पर हुए हमले, बेहुरमती और ज़ुल्म को याद कर मजलिसों में आँसू बहाएँगे, मगर घर लौट अपने बीवी बच्चों पर ज़ुल्म दोहराएँगे!

सोचता हूँ, कितने उसूली होंगे जो रोएंगे याद कर के भूख और प्यास नन्हे अली असग़र(अ. स) की, मगर फिर रोज़ उन इदारों का सामान ख़रीदेंगे जो आज अपने माली फ़ाएदे के लिए इस दुनिया में भुखमरी और प्यास फैलाने के ज़िम्मेदार हैं!

सोचता हूँ, कितने होंगे जो इमाम हुसैन (अ.स) को ग़ुलामों का सरदार और आज़ादी का मसीहा मानेंगे, पर ग़ुलामी और ज़ुल्म से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए उफ़्फ़ तक न करेंगे!

सोचता हूँ, कितने ही इमाम हुसैन (अ.स) को पूरी इंसानियत का मसीहा कहेंगे मगर अपनी बातों और सोच से उनको फ़िर्कों में बाँट देंगे और हुसैन के नाम को महज़ नारेबाज़ी तक महदूद कर देंगे!

सोचता हूँ, कितने लोग शिम्र पर और उसके उस ख़ंजर पर दिन रात बेशुमार लानत भेजेंगे जिस एक हथियार को उसने इमाम की गर्दन पर फेरा, मगर उन सैकड़ों हथियारों पर ख़ामोशी अख़्तियार कर लेंगे जिनको दुनिया के हर एक कोने पर भेजकर अमरीका, ब्रिटेन, इज़राइल और साऊदी, तबाही बरपा करते हैं!

सोचता हूँ, कितने हुसैन बनकर मजलिसों में आएँगे, मगर ग़ीबत और मुज़हका कर यज़ीद बन लौटेंगे, और कितने यज़ीदी इन दस दिनों में मजलिसों से हुसैन बन लौटेंगे- ख़ालिस और हक़ के रास्ते पर चलने के लिए हौसलामँद!

लेकिन सबसे पहले मैं ख़ुद के बारे में भी यही सोचता हूँ!!

(ये पोस्ट शेख जाफर लदक की इंग्लिश पोस्ट जिसका अब्बास शमाइल रिज़वी ने हिंदी में तर्जुमा किया है।)

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