सिर्फ ज़ियारत पर जाने से कुछ नहीं होता इसकी मारेफ़त भी ज़रूरी है: मौलाना हसनैन बाक़री

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ईरान इराक में मुक़द्दस रौज़ों की ज़्यारत के लिए जाने वाले ज़ायरीन की ट्रेनिंग और ज़रूरी हिदायत व अहकामात की जानकारी के लिए नेपियर रोड कॉलोनी स्थित अल्मास मैरिज हाल में करवाने विलायत की तरफ से शिविर का आयोजन किया गया जिसमे मौलाना क़ायम मेहदी, मौलाना हसनैन बकरी और मौलाना अरशद हुसैन अर्शी ने ज़ायरीन को जानकारी दी।

इस मौके पर ज़ायरीन के सवालों का जवाब भी देकर उनको ज़्यारत के दौरान होने वाले मुश्किलात और शरई मामलों में संतुष्ट किया गया।

शिविर के आयोजक खतीब ज़ैदी ने बताया कि इस शिविर का आयोजन करवाने विलायत की तरफ से ज़रूर किया गया था लेकिन इसमें सभी लोगों को आमंत्रित किया गया था चाहे वह जिस भी टूर ऑपरेटर के साथ जा रहे हो हमारा मक़सद शरई मामलों की जानकारी देना था उन्होने कहा की कई ऐसे लोग भी थे जो दूसरे काफिले में जा रहे हैं करवाने विलायत ऐसे षिविक का आयोजन करता रहेगा जिसमे सभी का स्वागत है।

मौलाना क़ायम मेहदी ने ज़ायरीन को ज़्यारत की अज़मत और उसके बाद इंसान की ज़िंदगी में तबदीली का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब इंसान ज़्यारत करने जाता है तो उसके ज़ेहन में यह होना चाहिए की वह सीधे इमाम की बारगाह में जा रहा है जो उसके लिए शराफ की बात है उन्होने ज़्यारत के वक़्त क्या करना चाहिए और क्या नहीं इसपर प्रकाश डाला।

मौलाना हसनैन बाकरी ने ज़ायरीन को बताया की कर्बला में खासकर खाने पर गौर करने की ज़रुरत है ज़ायरीन को चाहिए कि वह कर्बला में लज़ीज़ और अच्छे खाने से परहेज़ करे उसके ज़ेहन में इमाम हुसैन अस व शोहदाए कर्बला की मज़लूमियत ज़रूर रहनी चाहिए।

उन्होने कहा की ज़रूरी है ज़रूरतमंदों और कमज़ोरों के मददगार बने। हर किसी के अख्तियार में नहीं कि वह ज़्यारत का शराफ हासिल कर सके खुशकिस्मत हैं वह लोग जो ज़्यारत का शरफ हासिल करते हैं। इमाम हुसैन ने अपना सब कुछ अल्लाह के दीन की हिफाज़त में दे दिया अल्लाह ज़ायरीन को इसका सवाब देता है। सिर्फ ज़्यारत पर जाने से कुछ नहीं होता इसकी मारेफ़त भी ज़रूरी है उन्होने बताया की कम बोलना और अच्छा बोलना चाहिए खुदा की याद ज़रूरी है नफासत और पाकीज़गी का खास ध्यान होना चाहिए मौलाना हसनैन बाकरी ने कुछ ज़रूरी हिदायत भी दी।

मौलाना अरशद हुसैन अर्शी ने कहा की हमको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की हम एक ज़ायर के साथ ही अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं हमको ऐसा काम करना चाहिए की लोग जान सकें हम हिन्दुस्तानी हैं और इमाम अस की सीरत व शिक्षा पर सबसे ज़्यादा अमल करने वाले हैं उन्होने कहा की वक़्त की पाबंदी का खास ख्याल रहे ताकि सभी रौज़ों की ज़्यारत वक़्त पर और बगैर किसी परेशानी के की जा सके उन्होने बताया की रौज़े में जाते वक़्त ग़ुस्ल करके ही जाएँ और नमाज़ व ज़्यारत का खास ध्यान रहे वहाँ पर क़ुरआन , हदीस और सीरते अहलेबैत का ज़िक्र और अमल करना है जब ज़्यारत से वापस आये तो आपमें उसके असरात भी ज़ाहिर होने चाहिए। उन्होने ज़्यारत से मुताल्लिक ज़रूरी हिदायत और अहकामात भी बताये। इस मौके पर काफी तादाद में लोगों ने शिरकत की

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