सोशल मीडिया पर कुछ डालने से पहले सोचे क्या इस्लाम की गलत तस्वीर तो पेश नही हो रही

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आज की मीडिया में सोशल मीडिया एक प्रभावी जगह है जहां पर अपनी बात रख सकते हैं। ऐसे में इस के अच्छे और बुरे असर भी होते हैं।

जहां तक अपनी बातों को रखने की बात है बहुत सारे लोग आज भी सोशल मीडिया का अच्छा इस्तेमाल करके इस्लाम की सही तस्वीर पेश करते हैं लेकिन यह भी देखा गया है कि कुछ लोग इसे महज फसाद फैलाने के लिए इसको अपना का हथियार बनाए हुए हैं।

ऐसा देखा गया है कि लोग अक्सर एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हैं। ऐसी पोस्ट पर लोग जज्बात में आकर उस पर तरह-तरह के कमेंट भी करते हैं। लेकिन ऐसा करना सही है कि नहीं यह पहले सोचना चाहिए।

हाल ही में देखा गया है कि कुछ शर-पसंद लोग सोशल मीडिया पर आयतुल्लाह ख़ामेनई के खिलाफ लगातार प्रोपोगंडा करते रहते हैं और उनकी तोहीन करने के लिए भी पोस्ट डालते रहते हैं। लेकिन ऐसे में लोग जज़्बात में आकर एक दूसरे पर उंगली उठाना शुरू कर देते हैं।

यह कोई पहली बार नहीं है जब अयातुल्ला ख़ामेनई के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्व पोस्ट डाल कर उनकी तोहीन करने की कोशिश करते हैं।

इससे पहले भी कई शर-पसंद लोग न सिर्फ उनके बल्कि दीगर उलामा के खिलाफ प्रोपागेंडा इस तरह सोशल मीडिया पर किया जाता है। ऐसे में ना सिर्फ शिया समुदाय बदनाम होता है बल्कि सोशल मीडिया पर भी गलत मैसेज लोगों के बीच में जाता है।

इस्लाम में साफ कानून है कि आप किसी की भी दिल अज़ारी नहीं कर सकते हैं, अगर आप ऐसा करते हैं तो यकीनन न सिर्फ उस शख्स को बल्कि खुदा को भी नाराज करते हैं। ऐसे में आपको सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ कुछ करने से पहले सोच लेना चाहिए कि क्या आपने सच लिखा है कि नहीं। क्या इससे इस इस्लाम की सही तस्वीर जाती है।

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