प्रसिद्ध मौलाना की बेटी फातिमा बतूल ने आईएससी बोर्ड परीक्षा में हासिल किए 98 प्रतिशत अंक

Share This News

आज आईसीएससी के नतीजों में उत्तरप्रदेश के छात्र छात्रों का बेहतरीन प्रदर्शन सामने आया। आज 12वीं के परिणाम में अल्पसंख्यक छात्र एवं छात्राओं का भी बेहतरीन परिणाम सामने आया।

लखनऊ के हुसैनाबाद स्थित यूनिटी कॉलेज का परिणाम वैसे तो 100 प्रतिशत रहा लेकिन यहां की एक छात्रा फातिमा बतूल ने 98 प्रतिशत नंबर हासिल कर सिर्फ कॉलेज का ही नहीं बल्कि अपने परिवार का नाम रौशन किया है। फातिमा बतूल को मुबारकबाद देने अस्पताल से डॉ कल्बे सादिक़ खुद कॉलेज पहुंचे और फातिमा के साथ उनके वालिद मौलाना मंज़र सादिक़ का सम्मान किया।

फातिमा बतूल की माँ और वालिद धार्मिक शिक्षा से जुड़े हुए हैं लेकिन समाजी और आधुनिक शिक्षा में इनकी दिलचस्पी शुरू से ही रही। मौलाना मंज़र सादिक़ बच्चों के लिए एक मासिक पत्रिका भी निकालते हैं जिसमे सिर्फ धार्मिक बातीं ही नहीं बल्कि आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षाओं का तालमेल और जीवम व्यतीत करने के तरीके और कामयाबी पर ख़ास फोकस होता है।

जहां आज कल मुस्लिम बालिकाओं की शिक्षा को लेकर युद्ध जैसे हालत हैं वहीँ फातिमा बतूल हों या उनके भाई मैज़ियार दोनों ने अपने छात्र जीवन में कामयाबी के परचम बलन्द किये हैं। आज भी 10वीं के नतीजे में फातिमा के छोटे भाई सामिन रज़ा ने 95 प्रतिशत नंबर हासिल किया है।

फातिमा बतूल की वालिदा भी मदरसा जामियातुज़्ज़हरा में शिक्षिका हैं। उन्होंने भी हमेशा बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ ही आधुनिक शिक्षा पर ज़ोर दिया जिस तरह मौलाना मंज़र सादिक़ ने धार्मिक शिक्षा हासिल कर इसको अपना ज़रिए मार्श नहीं बनाया वैसे ही उन्होने बच्चों को भी शिक्षा दी।

धार्मिक शिक्षा में भी फातिमा बतूल हमेश फर्स्ट आयी कोई भी कम्पटीशन हो वह हमेशा फातिमा बतूल ने कामयाबी हासिल की। फ़ारसी में तक़रीर हो या उर्दू व अंग्रेजी में निज़ामत सभी में आगे रहने वाली फातिमा बतूल ने विदेशों से आये हुए मेहमानों को भी अपनी क़ाबलियत का लोहा मनवाया है।

आज उनकी कामयाबी पर उनको और उनके परिवार वालों को मुबारकबाद का सिलसिला जारी है लेकिन यह उनकी कामयाबी आने वाले वक़्त में और आला सतह पर परचम बलन्द करने की अलामत है। शुरू से लेकर आज तक फातिमा बतूल ने एक बात अच्छे से साबित की कि धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा दोनों को हासिल करने के लिए किसी एक को छोड़ने की ज़रुरत नहीं है बल्कि दोनों के दूसरे के पूरक हैं।

आम तौर पर देखा यह जाता है कि धार्मिक शिक्षा वाले आधुनिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा वाले धार्मिक शिक्षा को अलविदा कह देते हैं लेकिन फातिमा ने दोनों शिक्षाओं में हमेशा कामयाबी हासिल की और क़दम आगे बढ़ाय रखा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *