उनके लब पर कर्बला में हिन्द में आया था नाम, हिन्दुओं को यूं अकीदत हो गई शब्बीर से

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नवासाए रसूल हजरत इमाम हुसैन अ0 स0 के जन्मदिवस के अवसर पर एक मनकबती मुशायरे का आयोजन अजाखाना मैमूना खातून मौहल्ला मजापोता में किया गया जिसका आगाज मौलाना कारी मिकदाद हुसैन ने तिलावते कलामे पाक से तथा कमाल हैदर कमाल ने नाते पाक से किया। हदीसे किसा मौलाना कौसर मुजतबा ने पढ़ी। मुशायरे में देश भर के मशहूर शायरों ने हजरत इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश किये।

खुर्शीद हैदर मुजफफरनगरी ने अपने अंदाज में यूं पढ़ा
किसने कहा कि सिर्फ हमारा हुसैन है
कह दे जो या हुसैन उसी का हुसैन है
मुसव्विर जैदपुरी ने कुछ इस तरह कहा
आये तो बाल व पर दिये फितरूस को शाह ने
चलते चलाते हुर का मुकददर बना गये।

डा0 अजीम अमरोहवी ने पढ़ा
एक अनोखा एक निराला दुनिया ने ये मन्जर देखा
सीना ताने गर्दन देखी, सहमा सहमा खन्जर देखा

महेन्द्र कुमार अश्क ने अपनी अकीदत का इस तरह इजहार किया
मलाल कोई नहीं जिन्दगी में इसके सिवा
गमे हुसैन में रोने के जिन्दगी कम है

डा0 नाशिर नकवी ने कहा
फकत हुसैन, नहीं जिस पे इख्तेलाफ यकींन
कदम कदम पर हर एक खास व आम तेरा है

कलीम असगर बिजनौरी ने कहा
जमाना काश बुराई से दूर हो जाए
कभी तो ऐसा लगे मुस्कुरा रहे हैं हुसैन

पं0 भुवनेश शर्मा भुवन ने इस तरह अकीदत का इजहार किया
उनके लब पर कर्बला में हिन्द में आया था नाम
हिन्दुओं को यूं अकीदत हो गई शब्बीर से

शाने हैदर बेबाक ने कहा
फातेमा के लाल ने बख्शी हैं तासीरे इसे
देहर में खाके शिफा जैसी दवा कोई नहीं

इनके अलावा लियाकत अमरोहवी, तनवीर उस्मानी, मौलाना जकी काजमी, मकसूद अमरोहवी, सलीम अमरोहवी, खादिम शब्बीर, तकी जौलवी आदि ने भी कलाम पेश किया। अध्यक्ष्ता मौलाना गुलाम अब्बास ने तथा संचालन डा0 अजीम अमरोहवी ने किया।

इस अवसर पर महबूब हुसैन जैदी, अखतरूल अब्बसा गुलजार,अली हैदर रिजवी, शुजाउल हसन भैया,मौलाना मंजर सिरसिवी, अलमदार हुसैन, शफात हुसैन, वसीम हैदर नकवी, कैसर मुजतबा, अजादार हुसैन अली आबदी, हकीम सैयद हुसैन, मिक्की नकवी, हकीम सुहैल आदि उपस्थित रहे।

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