इमाम जाफ़र सादिक़ (अस) की वसीयत, ‘अमानतदार बनो और पड़ोसियों से अच्छा रवैय्या रखो’

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इल्म का समंदर कहे जाने वाले इमाम जाफर सादिक़ (अस) (Imam Jafar as Sadiq) ने अपने शियों को कुछ वसीयतें की थी, जिनको अगर अमल में लाया जाए तो बेहतर जीवन जिया जा सकता है।

आये जानते हैं इमाम जफ़र अल सादिक़ (Imam Jafar as Sadiq) की वसीयत के बारे में जो शिया होने के नाते हमे पता होनी चाहिए और साथ ही इमाम के चाहने वाले होने के नाते अपनी ज़िन्दगी में अमल करना चाहिए।

ज़ैद इब्ने शह्हाम का बयान है कि मुझ से इमाम सादिक़ (अस) ने फ़रमाया, तुम्हारी निगाह में जो भी मेरी पैरवी करने वाला और मेरे बारे में बातें करने वाला है उसको मेरा सलाम कहना, मैं तुम सभी को तक़वा और परहेज़गारी अपनाने, अल्लाह के लिए काम करने, सच बोलने, अमानतदारी को बाक़ी रखने, अधिक से अधिक सज्दे करने और पड़ोसियों से अच्छा रवैया अपनाने की वसीयत करता हूँ, क्योंकि पैग़म्बर यही शिक्षा और संस्कार ले कर आए थे।

इमाम (अस) (Imam Jafar as Sadiq) ने कहा की, जिन लोगों ने तुम को अमानतदार समझ कर अपना माल तुम्हारे पास रखवाया वह अच्छे लोग हों या बुरे, उनकी अमानत को उसी प्रकार वापिस कर दो, क्योंकि अल्लाह के नबी का फ़रमान है कि सुई धागा भी अगर हो उसको भी वापिस करो।

इमाम (अस) ने आगे फ़रमाया, अपने घर वालों और रिश्तेदारों के साथ नेकी करो, उनमें से अगर किसी को देहांत हो जाए तो जनाज़े में शामिल हो, जब वह बीमार हों उन्हें देखने जाओ, उनका हक़ अदा करते रहो, अगर तुम में से कोई इस प्रकार जीवन बिताता है तो उसे परहेज़गार और अच्छी नैतिकता वाला इंसान कहा जाएगा, और लोग उसको जाफ़री यानी इमाम सादिक़ का मानने वाला कहेंगे, और मुझे भी बहुत ख़ुशी होगी, और अगर कोई ख़ियानत करे या दुर्व्यवहार करे और इन बातों पर अमल न करे तो कहा जाएगा क्या यह इमाम सादिक़ (Imam Jafar as Sadiq) का मानने वाला है, और यही नैतिक गुण और संस्कार उन्होंने सिखाए हैं?

(उसूले काफ़ी, जिल्द 2, पेज 636)

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